10 साल के अवि शर्मा का बालमुखी रामायण के नाम से छप रहा ग्रंथ.
लॉकडाउन पीरियड में इंदौर के 10 साल के अवि शर्मा ने टेलीविजन पर प्रसारित होने वाले रामानंद सागर के सीरियल रामायण (Ramayana) से प्रेरणा लेकर 250 से ज्यादा छंदों में बालमुखी रामायण (Balmukhi Ramayana) लिख डाली है.
भारत को विश्व गुरू बनाने का सपना
अवि शर्मा का कहना है कि रामायण और खासतौर पर भगवान राम से वे खासे प्रभावित हुए. साथ ही उन्हें ऐसा लगा कि स्वप्न में मां सरस्वती आईं और उन्होंने मुझे इस रामायण का पहला छंद दिया. उसके बाद मैं लिखता चला गया और मैंने इसे बहुत सादी बोलचाल की भाषा में लिखा है, क्योंकि जो बाल्मिकी की रामायण और तुलसीदास की रामचरित मानस है उसके अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में लिखीं गईं है, उन्हें ज्यादा लोग समझ नहीं पाते. इसलिए मैंने इसे सरल भाषा में लिखा जिसे सब लोग समझ सकें और खासतौर पर मेरी उम्र के बच्चे इसे पढ़ सकें और समझ सके, क्योंकि हम बच्चे ही भारत का भविष्य हैं और अगर बच्चों ने भगवान राम के चरित्र को अपने जीवन में अपना लिया तो फिर भारत को विश्व गुरू बनने से कौन रोक सकता है .
पीएम बनना चाहता है अवि नेशनल ओलंपियाड में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के अलावा हिन्दू पुराण विद्या में कई सम्मान और ट्राफियां जीत चुके हैं अवि शर्मा का आध्यात्म के प्रति लगाव बचपन से ही रहा है, वे भागवत गीता के साथ रामायण और शिवपुराण जैसे ग्रंथ भी पढ़ते हैं. यही नहीं, वे रामायण, महाभारत और वेदों पर शास्त्रार्थ भी करते हैं. इतना ही नहीं, अवि शर्मा राजनीति में भी काफी दिलचस्पी रखते हैं इसके लिए उन्होंने संविधान की किताब भी मंगवा रखी है और वो भारत के संविधान का अध्ययन कर रहे हैं. अवि का कहना है कि वो बड़ा होकर देश का प्रधानमंत्री बनना चाहता है.
अल्बर्ट आइंसटीन से ज्यादा आईक्यू लेवल
अवि के माता पिता भी उन्हें काफी मोटिवेट करते हैं. उनकी मां विनिता शर्मा का कहना है कि 3 साल की उम्र से ही अवि का आईक्यू लेवल दूसरे बच्चों की तुलना में कहीं ज्यादा है. इस बात का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि आइंस्टिन का आईक्यू लेवल जहां 160 था तो वहीं अवि शर्मा का आई क्यू लेवल 161 है, वहीं दुनिया की दूसरी हस्तियों के आईक्यू लेवल की बात की जाए तो स्टीफन हॉकिन्स का आईक्यू 160, बिल गेट्स का 160,अब्राहिम लिंकन का 150, नेपालियन का 145 था. वाकई में अवि शर्मा की ये प्रतिभा देखकर हर कोई दांतों तले उंगलियां दबा लेता है. उम्र के शुरूआती दौर में आध्यात्म के प्रति इतना गहरा लगाव उन्हें उनकी उम्र के बच्चों से अलग बनाता है.
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First published: June 5, 2020, 5:06 PM IST