- अल्टीमेटम के बावजूद सोमवार को 70% अफसरों में किसी तरह का कोई फर्क नजर नहीं आया
- लंच के बाद ऑफिस नहीं आने वाले अफसरों में बमुश्किल 30% फीसदी में सुधार नजर आया
दैनिक भास्कर
Jun 09, 2020, 08:18 AM IST
भोपाल. पुलिस मुख्यालय में पदस्थ 29 अफसरों की कार्यप्रणाली को लेकर डीजीपी विवेक जौहरी की तरफ से एक दिन पहले दिए गए अल्टीमेटम के बावजूद सोमवार को 70% अफसरों में किसी तरह का कोई फर्क नजर नहीं आया। ज्यादातर पहले की तरह ही आधे घंटे के लंच से दो घंटे बाद ही दफ्तर लौटे। हालांकि, फर्क उन अफसरों पर जरूर नजर आया, जो अक्सर दफ्तर से गायब रहते थे। ऐसे तीन में से दो अफसर सोमवार को ऑफिस में ही नजर आए। लंच के बाद ऑफिस नहीं आने वाले अफसरों में बमुश्किल 30% फीसदी में सुधार नजर आया। डीजीपी विवेक जौहरी ने शनिवार को एक नोटशीट जारी कर इन अफसरों को सुधार के लिए चेतावनी दी थी।
गृहमंत्री और डीजीपी अफसरों को चापलूसी से बचाएं : उमा
उधर, डीजीपी की नोटशीट पर पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने ट्वीट किया कि जौहरी जैसा ईमानदार, साहसी अधिकारी ही इस मुद्दे को उठाने की पात्रता रखता है। अब इस मसले पर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा एवं जौहरी निर्णय लें और वरिष्ठ पुलिस अफसरों को चापलूसी, राजनीतिक दलों के परिवर्तन के साथ पक्षपात से बचाएं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने इस पर सहमति जताई और कहा- कमलनाथ सरकार ने कानून व्यवस्था ध्वस्त कर दी है। वहीं, आईपीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय यादव ने कहा कि इससे संगठन का लेना-देना नहीं है। उन्होंने अफसरों को तीन श्रेणी में बांटा था। इसमें पहली श्रेणी के तीन अधिकारी ऐसे हैं जो सामान्यत: ऑफिस नहीं आते हैं।
दूसरी श्रेणी में मुख्यालय में 12 अफसर ऐसे हैं, जो दोपहर बाद ऑफिस नहीं आते हैं, जबकि तीसरी श्रेणी में 14 सीनियर अफसर ऐसे हैं जो लंच समय (2 से 2:30 बजे) घर जाते हैं और लगभग दो घंटे से ज्यादा समय के बाद ऑफिस लौटते हैं। हालांकि उन्होंने किसी के नाम जाहिर नहीं किए थे। इस वजह से ज्यादातर ने इसे कोई खास तवज्जो नहीं दी। इनमें सबसे ज्यादा संख्या उन अफसरों की थी, जिनका लंच आधे के बजाय दो-ढाई घंटे का होता है। इनमें से 70 फीसदी अफसर सोमवार को भी पहले की तरह देर से ही आए। लंच के काफी देर बाद तक उनके केबिन खाली ही पड़े रहे।
सूत्रों के अनुसार, अक्सर ऑफिस से नदारद रहने वाले दो अफसर जरूर सोमवार को दिखाई दिए। लंच तक ही ऑफिस में नजर वाले अफसरों में से आधा दर्जन बाद में भी ऑफिस आए। हालांकि डीजीपी की नोटशीट को लेकर कुछ सीनियर अफसरों ने आपत्ति भी जताई है। उनका कहना है, वे संबंधित अफसरों से सीधे बात कर सकते थे।