- आज वर्ल्ड ब्लड डाेनर डे पर ऐसे ही कुछ युवाओं की कहानी…
दैनिक भास्कर
Jun 14, 2020, 09:24 AM IST
भोपाल. विवेक राजपूत. लाॅकडाउन में खाने-पीने की सामग्री से लेकर आवागमन तक की व्यवस्थाएं थम गई थीं, बावजूद इसके कुछ युवा लाेगाें की जान बचाने में जुटे थे। दिन हाे या रात, तमाम बंदिशाें और परेशानियाें काे पीछे छाेड़ते हुए वे कभी अस्पताल ताे कभी ब्लड बैंक पहुंचकर लाेगाें की मदद कर रहे थे। ये काेई और नहीं हमारे शहर के ही युवा ब्लड डाेनर हैं। सड़क हादसे में घायल युवक, ऑपरेशन थिएटर में दाखिल महिला और थैलेसीमिया पीड़ित मासूमों के लिए इन्हाेंने ब्लड डाेनेट किया। आज वर्ल्ड ब्लड डाेनर डे पर ऐसे ही कुछ युवाओं की कहानी…
आधी रात को सड़क हादसे में घायल युवक को दिया ब्लड
जहांगीराबाद के सलाहुद्दीन खान निजी स्कूल में आईटी हेड हैं। इन्हाेंने 30 मार्च को रात 12 बजे हमीदिया अस्पताल में ब्लड डाेनेट कर सड़क हादसे में घायल युवक की जान बचाई थी। सलाहुद्दीन ने बताया कि 3 साल पहले पत्नी का मेजर ऑपरेशन हुआ, 12 यूनिट ब्लड की जरूरत थी। शहर के ब्लड डाेनर्स ने ब्लड दिया था। तभी से वे ब्लड डाेनेट करने लगे। अब तक 10 से ज्यादा बार ब्लड डाेनेट कर चुके हैं।
सिर्फ एक फोन आया और ब्लड देने पहुंच गए पति-पत्नी
टीटी नगर निवासी अनीता बरछे साेशल वर्कर हैं। 6 मई काे उनके पास फाेन आया कि 17 साल का थैलेसीमिया पीड़ित एक युवा 46 किमी पैदल चलकर ब्लड चढ़वाने भाेपाल आया है, लेकिन, ब्लड बैंक में खून नहीं मिल रहा। तब अनीता और उनके पति पवन ने दाे यूनिट ब्लड डाेनेट किया। अनीता 3 साल में 12 बार और पवन 5 साल में 15 बार ब्लड डाेनेट कर चुके हैं।
पिता करते हैं ब्लड डोनेट, इस बार खुद ने किया
वर्धमान ग्रीन पार्क में रहने वाले 19 साल के परमजीत सिंह हाेटल मैनेजमेंट के स्टूडेंट हैं। 5 जून काे एम्स में एक महिला के लिए ब्लड डाेनेट किया। महिला को जाे व्यक्ति ब्लड देने के लिए आने वाले थे, वे लाॅकडाउन के कारण नहीं आ पाए। यह बात परमजीत काे पता चली ताे उन्हाेंने जिम्मेदारी निभाई। उन्हाेंने बताया कि पापा भी ब्लड डाेनेट करते हैं। मैं 19 साल का हुअा ताे पहली बार ब्लड दिया।
पिछले 6 साल में 11 बार रक्तदान कर चुके हैं सुप्रीत
भारत नगर जेके राेड निवासी सुप्रीत सिंह सलूजा न सिर्फ ब्लड डाेनेट करते हैं, बल्कि दूसरे ब्लड डाेनर्स की मदद भी करते हैं। लाॅकडाउन में सुप्रीत ने डोनर को अपने वाहन से हाॅस्पिटल या ब्लड बैंक लाने का काम किया। 7 मई काे थैलेसीमिया पीड़ित 6 साल के बच्चे के लिए ब्लड दिया। वे 6 साल में 11 बार ब्लड डाेनेट कर चुके हैं।