चाय वाले की बेटी आंचल गंगवाल बनी फ्लाइंग ऑफिसर
आंचल गंगवाल (Aanchal Gangwal) कहती हैं कि मुसीबतों से नहीं घबराने का सबक उन्होंने अपने पिता से सीखा है. ‘आर्थिक परेशानियां जीवन में आती हैं, लेकिन मुश्किलों का मुकाबला करने का हौंसला होना और किसी भी कीमत पर लक्ष्य तक पहुंचने का जज्बा होना जरूरी है.
कोरोना महामारी के चलते पहली बार पासिंग आउट परेड में कैडेट्स के माता-पिता को शामिल होने का न्योता नहीं दिया गया था. आंचल कहती हैं कि ‘हर किसी की इच्छा होती कि जब उसका सपना साकार हो रहा हो, तो उसके माता-पिता ऐसा होता हुआ देखें. वो हैदराबाद न आ सके, लेकिन उन्होंने ऑनलाइन पूरे इंवेंट को देखा है. मैं जो भी कर सकी हूं, वो अपने माता-पिता की तपस्या की वजह से ही कर पाई हूं’. एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर बनने के लिए आंचल पुलिस सब इंस्पेक्टर और लेबर इंस्पेक्टर की नौकरी छोड़ चुकी हैं. सिर्फ एक लक्ष्य बनाकर एयरफोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट देती रही और छठें प्रयास में सफलता मिल ही गई.

स्कूल समय से ही मेघावी रही आंचल यूपीएससी क्वालीफाई करके कलेक्टर बनना चाहती थीं. उनके पिता सुरेश गंगवाल बताते हैं कि ‘उत्तराखंड के केदारनाथ में आई त्रासदी ने आंचल के जीवन का लक्ष्य ही बदल दिया. एयरफोर्स ने केदारनाथ त्रासदी में जिस तरह से लोगों की मदद की, उसे देखकर आंचल ने मन बना लिया कि वो एयरफोर्स का हिस्सा बनकर देश सेवा करेंगी’. तैयारी के दौरान सबसे पहले आंचल मध्य प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर के लिए चयनित हो गईं. लेकिन साढे तीन महीने की ट्रेनिंग के बाद ही आंचल ने पुलिस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया. चाय बेचकर तीन बच्चों को पढ़ाने लिखाने वाले सुरेश बताते हैं कि ‘ मैंने बेटी को बहुत समझाया कि पुलिस की नौकरी न छोड़े, लेकिन वो नहीं मानी. इसके तुरंत बाद वो लेबर इंस्पेक्टर के लिए सिलेक्ट हो गईं. लेकिन जिसे आसमान में उड़ने की ललक हो, वो भला कहा रुक पाती. 8 महीने बाद ही लेबर इंस्पेक्टर की नौकरी से भी उसने ने इस्तीफा दे दिया’. सुरेश ने अपनी बेटी को दोनों बार नौकरी नहीं छोड़ने का मशवरा जरूर दिया, लेकिन हर बार बेटी के फैसले को स्वीकार भी किया.
चाय बेचकर घर चलाने वाले सुरेश का बड़ा बेटा इंजीनियर है. दूसरी बेटी फ्लाइंग अफसर बन गई है और सबसे छोटी बेटी बी कॉम की छात्रा है. आंचल कहती हैं कि मुसीबतों से नहीं घबराने का सबक उन्होंने अपने पिता से सीखा है. ‘आर्थिक परेशानियां जीवन में आती हैं, लेकिन मुश्किलों का मुकाबला करने का हौंसला होना और किसी भी कीमत पर लक्ष्य तक पहुंचने का जज्बा होना जरूरी है. लड़कियां किसी से कम नहीं हैं और दृढ़ इच्छा शक्ति से अपने सपने को साकार कर सकती हैं. आंचल नहीं चाहती कि उसके पिता चाय बेचने का काम अब बंद कर दें. उसके मुताबिक काम कोई भी बड़ा या छोटा नहीं होता. ईमानदारी से किया गया हर काम बड़ा होता है. हालांकि आंचल की इच्छा है कि अपनी तनख्वाह से वो अपने पिता की चाय की दुकान को थोड़ा ठीक करवा दें और ताकि जब तक पिता चाहें, तब तक चाय की दुकान अच्छे से चला सकें.
First published: June 21, 2020, 5:36 PM IST