Khandwa News In Hindi : Maintenance allowance for women and children was also discontinued from Corona | कोरोना से महिलाओं और बच्चों का गुजारा भत्ता भी हुआ बंद

Khandwa News In Hindi : Maintenance allowance for women and children was also discontinued from Corona | कोरोना से महिलाओं और बच्चों का गुजारा भत्ता भी हुआ बंद


  • न्यायालय बंद होने से फैमिली कोर्ट के करीब 800 प्रकरण लंबित, वकीलों के घर के चक्कर लगा रही पीड़ित महिलाएं

दैनिक भास्कर

Jul 11, 2020, 07:50 AM IST

खंडवा. लॉकडाउन के बाद से फैमिली कोर्ट के कामकाज भी लॉक पड़े हैं। चार माह बीत गए, कोर्ट में लंबित प्रकरणों के फैसलों में सुनवाई नहीं हो रही। नए केस भी दायर नहीं हो रहे। ऐसे हालात में उन महिलाओं व बच्चों की परेशानी बढ़ गई है जो गुजारा भत्ते पर जीवन यापन कर रहे हैं। कोर्ट के आदेश पर महिलाओं व बच्चों को हर माह दी जाने वाली परवरिश राशि कोर्ट मेंे जमा नहीं हो रही है।
फैमिली कोर्ट में चल रहे प्रकरणों में कोर्ट के आदेश के बाद महिलाओं को उनके पति गुजारा भत्ते की राशि चेक से देते हैं या सैलरी में से कटौती होकर उनके खाते में राशि जमा हो जाती है। अगर कटोत्रा का आदेश नहीं देती है तो अनावेदक स्वेच्छा से आवेदिका के बैंक खाते में जमा कर देता है। जिसकी उसके पास जमा रसीद कोर्ट में दिखाने के लिए रहती है। कोरोनाबंदी के कारण यह राशि पीड़ित महिलाओं तक नहीं पहुंच पा रही है। कुटुंब न्यायालय खंडवा में गुजारा भत्ता, भरण-पोषण 550 क्रिमिनल केस व 250 सिविल केस हिंदु मैरिज एक्ट के तहत विवाह विच्छेद (तलाक) आदि केस लंबित हैं।

केस 1: 7 माह से नहीं मिला भत्ता 
साहिश्ता बी को गुजारा भत्ता की राशि उसके पति द्वारा तीन हजार रुपए प्रति माह दी जाती है। दिसंबर 19 से अब तक एक रुपया भी नहीं मिला। महिला का पति कोर्ट खुलने का इंतजार कर रहा है।

केस 2: पूछती है कोर्ट कब खुलेगी? 
कविता पति सुरेश के दो बच्चे हैं। चार महीने से गुजारा भत्ता नहीं मिला। वह अपने वकील को फोन कर एक ही बात पूछती है कोर्ट कब खुलेगी। मुझे गुजारा भत्ता की राशि कब मिलेगी।

निर्णय के बाद भी महिलाओं को राशि नहीं मिली
शासकीय अधिवक्ता मोहन गंगराड़े ने कहा कि अनलॉक होने को सवा माह बीत गया है। कोर्ट खुलने पर नए मामलों के साथ ही पक्षकारों की भीड़ भी बढ़ेंगी। लॉकडाउन के पहले भरण-पोषण के कई केस निर्णय या आदेश के करीब थे वह भी लंबित हो गए। जिन मामलों में निर्णय हो चुका है, उनमें भी महिलाओं को राशि नहीं मिल रही। हम लोग उच्च न्यायालय के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। न्यायालय को इस मामले पर विचार करना चाहिए।



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