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उज्जैन8 मिनट पहले
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बाबा महाकाल की सुबह भस्मआरती की गई, जिसमें केवल पंडे-पुजारी ही शामिल हुए।
- अलसुबह 2. 30 बजे बाबा महाकाल के पट खुले, पंचामृत अभिषेक के बाद भस्मारती हुई
- कोरोनाकाल में भक्त सुबह 5.30 बजे से रात 9 बजे तक कर सकते हैं महाकाल के दर्शन
सावन का तीसरा सोमवार होने के कारण सोमवार अलसुबह बाबा महाकाल की विशेष भस्मारती की गई। हालांकि कोरोना के कारण आरती में भक्त शामिल नहीं हो पाए। अलसुबह 2. 30 बजे बाबा महाकाल के पट खोले गए और पंचामृत अभिषेक के बाद भस्मारती शुरू हुई। बाबा महाकाल आज तीसरी बार शाम को प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलेंगे। अलसुबह से बाबा के दर्शन को पहुंचे भक्तों को आरती के बाद प्रवेश दिया गया। सावन मास भगवान भोलेनाथ का सबसे प्रिय महीना माना गया है। मान्यता है कि सावन में शिव आराधना करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है।
पंडित आशीष पूजारी के अनुसार, सावन का तीसरा सोमवार होने से महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। इसके बाद विशेष भस्मारती की गई। भस्मारती के पहले बाबा को जल से नहलाकर महापंचामृत अभिषेक किया गया। इसमें दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस शामिल थे। अभिषेक के बाद भांग और चंदन से भोलेनाथ का आकर्षक श्रृंगार किया गया और बाबा को भस्म चढ़ाई गई। भस्मिभूत होने के बाद भगवान को वस्त्र धारण कराए गए और फिर झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े व शंखनाद के साथ बाबा की भस्मारती की गई।
उन्होंने बताया कि वैसे तो सावन महीने में भस्म आरती में 2 हजार से अधिक भक्त भस्मआरती में शामिल होते थे, लेकिन इस साल कोरोना महामारी के चलते श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। आम श्रद्धालु केवल बाबा महाकाल के दूर से ही दर्शन कर सकते हैं। दर्शन के लिए सुबह 5.30 बजे से रात 9 बजे तक का समय तय किया गया है। इस दौरान केवल वही भक्त दर्शन कर सकेंगे, जिन्होंने पूर्व में दर्शन के लिए बुकिंग करा रखी है और जो केवल मध्यप्रदेश के ही रहने वाले हैं। महाकाल मंदिर समिति ने सावन माह में प्रतिदिन 10 हजार भक्तों को दर्शन कराने का प्रबंध किया है।
शाम 4 बजे प्रजा का हाल जनने निकलेंगे बाबा महाकाल
सावन के तीसरे सोमवार को शाम 4 बजे बाबा महाकाल प्रजा का हाल जानने निकलेंगे। बाबा की सवारी महाकाल मंदिर से लाव-लश्कर के साथ निकलेगी, जहां शिप्रा नदी तक जाएगी। यहां अभिषेक पूजन के बाद बाबा फिर से मंदिर की ओर प्रस्थान करेंगे। कोरोना के कारण इस बार भी भक्तों को बाबा की सवारी में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। वे ऑनलाइन दर्शन कर सकते हैं।
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