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- Retired Colonel Bhupendra Singh, Who Had Grabbed Land Worth Rs 1500 Crore, Was Denied Bail In The Sessions Court, Accused Of Misleading The Court.
कीर्ति गुप्ता, भोपाल2 घंटे पहले
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भोपाल में 1500 करोड़ की जमीन हथियाने वाले रिटायर्ड कर्नल भूपेंद्र सिंह की जमानत सेशन कोर्ट से नामंजूर कर दी। -फाइल फोटो
- अदालत को गुमराह कर जमानत लेने के मामले में सरेंडर करने के बाद जेल गए
- कानूनी प्रावधानों का फायदा आरोपियों को मिला था और उन्हें जमानत मिली थी
भोपाल की तिलक हाउसिंग सोसायटी की फर्जी पॉवर ऑफ अटॉर्नी से 1500 करोड़ की 94 एकड़ जमीन हथियाने वाले मास्टर माइंड रिटायर्ड कर्नल भूपेंद्र सिंह को सेशन कोर्ट ने जमानत देने से इंकार कर दिया है। न्यायाधीश राकेश कुमार शर्मा ने जमानत नामंजूर करते हुए लिखा कि आरोपी ने पूर्व में दी गई जमानत आदेश का पालन नहीं किया और 45 दिन बाद सेशन कोर्ट में सरेंडर भी नहीं किया। अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत नामंजूर की जाती है।
सेशन कोर्ट से जमानत नामंजूर होने के बाद अब भूपेंद्र की जमानत हाईकोर्ट में लगेगी। भूपेंद्र सिंह ने मजिस्ट्रेट कोर्ट को गुमराह कर जमानत तो ले ली, लेकिन फरियादी ने हाइकोर्ट में शिकायत की, तो सीजेम ने उसकी गिरफ्तार का आदेश दे दिया। गिरफ्तारी वारंट की भनक लगते ही कर्नल भूपेंद्र ने नाटकीय ढंग से सीजेएम कोर्ट में सरेंडर कर जमानत मांगी थी। सीजेएम निशीथ खरे ने जमानत नामंजूर कर उसे जेल भेज दिया था।
भूपेंद्र को इलाज के लिए 45 दिन की जमानत मिली थी
जेल जाने के बाद भूपेंद्र ने गंभीर बीमारियों का हवाला देते हुए न्यायाधीश अजय श्रीवास्तव की कोर्ट से जमानत मांगी थी। अदालत से उन्हें 45 दिन की जमानत मिली थी। आरोपी को 45 दिन बाद अदालत में सरेंडर करना था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। भूपेंद्र ने अदालत को गुमराह करते हुए 90 दिनों में चालान पेश न होने की बात कहते जमानत मांगी और उसे नियमानुसार मिल भी गई। लेकिन भूपेंद्र ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में जमानत पेश नहीं की, क्योंकि वह तो पहले से जेल से बाहर आ चुका था।
90 दिन में चालान पेश न होने पर जमानत मिली थी
इस मामले में जेल में बंद आरोपियों शफीक मोहम्मद, रफीक और रंजीत को जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू की लापरवाही के चलते को जमानत मिल गई थी। जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू इतने गंभीर मामले में भी 90 दिनों में भी चालान पेश नहीं कर सकी और इसका फायदा आरोपियों को मिला। इसी साल 8 मई को मजिस्ट्रेट लालता प्रसाद ने तीनों आरोपियों की जमानत मंजूर करते हुए उन्हें जेल से रिहा किए जाने के आदेश दिए थे।
पांच आरोपी गिरफ्तार हुए थे
फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी मामले में पांच आरोपी गिरफ्तार हुए थे। इसी साल 7 फरवरी को भू-माफिया के खिलाफ चल रहे अभियान माफिया मुक्त मध्य प्रदेश में कोहेफिजा पुलिस ने जमीन के बड़े खेल का खुलासा किया था। तीन साल की लंबी जांच के बाद पुलिस ने तिलक सहकारी गृह निर्माण सोसायटी के अध्यक्ष रिटा. कर्नल भूपेंद्र सिंह, उपाध्यक्ष व होटल सूरज के संचालक शफीक मोहम्मद सहित पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया था। साथ ही समिति के 14 पदाधिकारियों के खिलाफ भी धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। एयरपोर्ट रोड की 93.5 एकड़ जमीन फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी (मुख्तारनामा) के जरिए हथियाने और इस पर इंद्रविहार कॉलोनी बनाकर 1700 से ज्यादा लोगों को प्लॉट बेचने का आरोप था। वर्तमान में जमीन की कीमत करीब 1500 करोड़ रुपए है।
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