71 percent youths of Madhya Pradesh wear masks when they get out of the house, 9 percent of youth do not apply masks, they consider themselves strong | प्रदेश में 71 प्रतिशत युवा घर से बाहर निकलने पर लगा लेते हैं मास्क, 9 फीसदी मास्क लगाते ही नहीं, क्योंकि वो खुद को स्ट्रांग मानते हैं

71 percent youths of Madhya Pradesh wear masks when they get out of the house, 9 percent of youth do not apply masks, they consider themselves strong | प्रदेश में 71 प्रतिशत युवा घर से बाहर निकलने पर लगा लेते हैं मास्क, 9 फीसदी मास्क लगाते ही नहीं, क्योंकि वो खुद को स्ट्रांग मानते हैं


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भोपाल3 मिनट पहले

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फेस मास्क को लेकर युवाओं के व्यवहार पर एक ऑनलाइन सर्वे किया गया है, जिसमें मध्यप्रदेश के 70 विभिन्न शहरों और कस्बों के 1 हजार से अधिक युवाओं ने भाग लिया।

  • 20 फीसदी कभी-कभार मास्क लगाते हैं, 90% युवाओं ने माना कि फेस मास्क सभी लोग लगाएं तो लॉकडाउन की जरूरत नहीं होगी
  • जुलाई के आखिरी 7 दिन में युवाओं पर एक ऑनलाइन सर्वे में सामने आए मास्क लगाने के फायदे, न लगाने के नुकसान

मध्य प्रदेश और राजधानी भोपाल में जुलाई में दोगुनी रफ्तार से कोरोना के केस बढ़े हैं। यही वजह रही कि भोपाल में राज्य सरकार को 10 दिन का लॉकडाउन लगाना पड़ा। कोरोना संक्रमण को रोकने में मास्क को सबसे कारगर माना जा रहा है, इसलिए कोरोना गाइडलाइन में स्पष्ट है कि घर से बाहर निकलने पर मास्क लगाना ही होगा। नहीं लगाने पर पकड़े गए तो जुर्माना भरना पड़ेगा। इसके बावजूद लोग मास्क लगाना कम ही पसंद करते हैं। मास्क को लेकर युवाओं में क्या ट्रेंड है। वह मास्क लगाने को सेहत के लिए कितना फायदेमंद समझते हैं, अगर नहीं लगाया तो इसके नुकसान क्या हैं?

इसी व्यवहार को समझने के लिए मध्यप्रदेश के कॉलेज जाने वाले युवाओं पर एक ऑनलाइन सर्वे किया गया। इसमें 71 प्रतिशत युवाओं ने कोरोना काल में पिछले 7 दिनों में मास्क पहना है। वहीं 16% युवाओं ने कुछ समय के लिये तथा शेष 4% ने बहुत ही कम समय के लिए मास्क पहना। सर्वे देश के सात राज्यों में जुलाई के आखिरी सप्ताह में किया गया, जिसमें मध्य प्रदेश भी शामिल था। इसमें 9 फीसदी युवा ऐसे भी हैं, जो खुद को बहुत स्ट्रांग मानते हैं, इसलिए मास्क नहीं लगाते हैं।

ये सर्वे जॉन हापकिंग्स चार कार्यक्रम के रिसर्च एवं स्ट्रेटिजिक प्लानिंग के पूर्व निदेशक प्रदीप कृष्णात्रे, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं पब्लिक रिलेशन्स सोसायटी भोपाल के चेयरमैन पुष्पेंन्द्र पाल सिंह, पीआर एसआई के नेशनल काउंसिल मेम्बर मनोज द्विवेदी एवं सचिव डॉक्टर संजीव गुप्ता द्वारा जुलाई 2020 के अंतिम सप्ताह में किया गया।

इस सर्वे में पब्लिक रिलेशन्स सोसायटी भोपाल के चेयरमैन पुष्पेंद्र पाल सिंह और तीन अन्य विशेषज्ञ शामिल रहे।

कुछ युवा ऐसे भी नहीं पहनते फेस मास्क
ऐसे युवा जो फेस मास्क पहनते हैं उनमें से 54 प्रतिशत युवाओं ने कोरोना संक्रमण से स्वयं को बचाने के लिए, 8 प्रतिशत ने दूसरों को बचाने के लिये मास्क पहनते हैं। 23 प्रतिशत मानते हैं कि बाद में संक्रमण हो इससे बेहतर है कि मास्क पहनकर सुरक्षित रहा जाए। इस सर्वे में 9 प्रतिशत लोग ऐसे भी थे जिन्होंने स्वीकार किया कि वह मास्क पहनते ही नहीं हैं। इसके दो कारण बताए। पहला, वह या तो घर से बाहर ही नहीं निकलते हैं या फिर वह स्वयं अपनी सुरक्षा कर लेते हैं। सर्वे में बहुत कम संख्या में लोगों ने मास्क ना पहनने के यह कारण भी बताये हैं कि ‘वह बहुत सशक्त हैं, उन्हें कुछ नहीं हो सकता है’ या कि ‘मास्क पहनना बहुत महंगा है।’

अगर लोग मास्क लगाएं तो लॉकडाउन की जरूरत नहीं होगी
57 फीसदी युवा कपड़े का बना, 20 प्रतिशत एन-95 और 18 प्रतिशत सर्जिकल मास्क पहनते हैं। अध्ययन में 48% यानि कि लगभग आधे लोगों ने बताया कि बात करते समय कभी भी मास्क नहीं उतारते हैं। किन्तु 9 प्रतिशत हर समय मास्क उतारते हैं। 21 प्रतिशत कभी-कभी, 22 प्रतिशत बहुत ही कम मास्क उतारते हैं। 42 प्रतिशत लोग ही मानते हैं कि फेस मास्क कोविड-19 से पूर्ण सुरक्षा प्रदान करने में सहायक है। सर्वे के 63 प्रतिशत लोग यह मानते है कि यदि आबादी के 90 प्रतिशत लोग फेस मास्क पहनने लगें तो लॉक डाउन की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।

ऐसे किया गया सर्वे

मध्यप्रदेश के 70 विभिन्न शहरों और कस्बों के 1 हजार से अधिक युवाओं ने ऑनलाइन प्रश्नावली भरकर इस अध्ययन में हिस्सा लिया। इन 1 हजार रिस्पांडेंट में से 90 प्रतिशत 18 से 25 वर्ष की आयु के एवं अविवाहित हैं। इनमें से 87 प्रतिशत लड़कियां, 67 प्रतिशत स्नातक, 22 प्रतिशत पोस्ट ग्रेजुएट एवं पीएचडी थे। इनमें 11 प्रतिशत ऐसे भी थे जिन्होंने हायर सेकंडरी या उससे कम शिक्षा प्राप्त की है।

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