आईआईटी मुंबई से केमिकल इंजीनियरिंग में ग्रेज्युएट हैं
UPSC 2019 result-पति के निधन के बाद मयंक (mayank) की मां ने स्टोरकीपर की नौकरी कर बेटे को पाला. वो कहती हैं आसान नहीं था जीवन का ये सफर,
25 साल के मयंक गुर्जर ने यूपीएससी 2019 की परीक्षा में 455 वी रैंक हासिल की है.उनका परिवार मूलतः हरदा जिले के डेडगांव का रहने वाला है. लेकिन उनके पिता स्वर्गीय गोविंद गुर्जर 35 वर्ष पहले हरदा जिले के डेडगांव से आकर इंदौर के विराट नगर मूसाखेड़ी जाकर बस गए थे. वो एक निजी कंपनी में अकाउंटेंट थे. अप्रैल 2014 में पिता के निधन के बाद मयंक की मां ने इंदौर के दवा बाजार में एक फार्मा कंपनी में स्टोरकीपर की नौकरी कर घर की ज़िम्मेदारी संभाली और आज उनके संघर्ष का सुखद परिणाम बेटे मयंक ने दिया.
पहले प्रयास में सफलता
मयंक गुर्जर ने यह सफलता पहले ही प्रयास में हासिल की है. उनकी सफलता का ये पहला मुकाम नहीं है. वो आईआईटी मुंबई से केमिकल इंजीनियरिंग में ग्रेज्युएट हैं. इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते हुए मयंक ने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी. 2019 में केमिकल इंजीनियर में स्नातक होने के बाद यूपीएससी का फार्म भरा. पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ायी. मयंक ने बताया जब उनके पिता का निधन हुआ उस समय उन्होंने 12 वीं की परीक्षा दी थी. पिता के जाने के बाद उनकी माताजी ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा दी. वो कहते हैं अगर हौंसले बुलंद हों तो कोई भी रास्ता कठिन नहीं होता. इस उपलब्धि पर वे बेहद खुश हैं और इसका पूरा श्रेय अपनी मां और ईश्वर को देते हैं.निधन से 8 दिन पहले पिता ने कहा था
मयंक की माताजी प्रेमलता गुर्जर 12 वीं तक शिक्षित हैं. पति के गुजर जाने के बाद मां प्रेमलता ने पिता की ज़िम्मेदारी भी खुद निभायी. वो बताती हैं कि दो साल तक उनके पति बीमार रहे. देहांत से आठ दिन पहले मयंक के पिता ने उनसे कहा था कि भले ही मकान बेच देना पर मयंक को आगे बढ़ाना. बस पति की इसी अंतिम बात को उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया.
मां का संघर्ष
2014 पति के देहांत के बाद घर से बाहर जाकर काम करना उनके लिए आसान नहीं था. लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. राह बनती गयी और बेटा सफलता की मंज़िल तक पहुंचता गया. प्रेमलता गुर्जर कहती हैं कि आज मिली इस खुशी तक पहुंचने के लिए मयंक और मैंने दोनों ने ही संघर्ष किया. वो गर्व से कहती हैं कि उन्होंने कभी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाए. किसी से मदद नहीं मांगी. खुद ही मेहनत और संघर्ष किया.
बिना कोचिंग सफलता
मयंक ने पिता के निधन के बाद ही इंजीनियरिंग का एक्जाम दिया और आईआईटी मुंबई में वो सलेक्ट भी हो गए. लेकिन उस वक्त उन्होंने IIT ज्वॉइन नहीं किया, क्योंकि वो अपनी मां को उस समय छोड़कर नहीं जाना चाहते थे. कुछ समय बीतने बाद उन्होंने फिर एक्जाम दिया और दोबारा सलेक्ट होकर मुंबई आईआईटी पहुंचे. मुंबई में चौथे साल में मयंक ने UPSC की तैयारी की. लाइब्रेरी में बैठकर वो घंटों पढ़ते थे. खास बात ये है कि मयंक ने ये सफलता बिना कोई कोचिंग किये हासिल की है.
जब मां रूठ जाती थी तो मनाता था मयंक
पिता के निधन के बाद मयंक ने पढ़ाई के साथ-साथ अपनी माँ का भी ध्यान रखा. कई ऐसे मौके आए जब मां प्रेमलता गुर्जर मायूस हो जाती थीं. या किसी बात पर गुस्सा हो जाती थीं. फिर मयंक उन्हें प्यार से मनाकर समझाता था.