बुरहानपुर10 मिनट पहले
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- परचून भी 30% ही बुरहानपुर पहुंचा, ट्रांसपोर्ट नगर परिसर में खड़े कर दिए गए ट्रक
- 100 से ज्यादा ट्रांसपोर्ट्स ऑफिस बंद, केला और कपड़ा निर्यात नहीं हुआ
ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल के बाद सोमवार काे बुरहानपुर से केला और कपड़ा निर्यात नहीं हुआ। कपड़ा बनाने के लिए जरूरी सूत भी बुरहानपुर नहीं पहुंचा। परचून भी सिर्फ 30 फीसदी ही जिले में आ पाया। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से पांच हजार से ज्यादा लोगों के रोजगार पर असर पड़ा। एक दिन में करीब 15 करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार प्रभावित हुआ। सिर्फ 5 से 10 फीसदी ट्रकों से ही जरुरी सामान परिवहन किया गया।
रविवार रात 12 बजे से जिलेभर के करीब 90 फीसदी ट्रक, मिनी ट्रक सहित और वाहनों के पहिए थम गए। सुबह इंदौर-इच्छापुर हाईवे स्थित ट्रांसपोर्ट नगर में चारों ओर ट्रक ही ट्रक खड़े नजर आए। 100 से ज्यादा ट्रांसपोर्ट ऑफिस बंद रहे। ऐसे में ड्राइवर और क्लीनर दिनभर घूमते-फिरते नजर आए। कुछ ट्रकों में नींद लेते दिखे तो कुछ ट्रकों की मरम्मत करते रहे। ढाबा, होटल और चाय-पान की गुमटियों पर चहल-पहल रही। लोग अपना पार्सल लेने के लिए ट्रांसपोर्टर्स के ऑफिस पहुंचे, लेकिन ऑफिस बंद देख लौट गए। ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल से प्रत्यक्ष रूप से बहुत कम असर रहा। सबसे ज्यादा असर केला, कपड़ा, सूत और परचून का आयात-निर्यात बंद होने से पड़ा है।
ये हो रहा नुकसान : फल-सब्जी का 25 और परचून का 70 फीसदी कारोबार प्रभावित
जिले में इंदौर, जलगांव और नासिक से रोजाना परचून तथा फल-सब्जियों का आयात होता है। पिछले 24 घंटे में परचून का आयात बंद होने से 2 करोड़ से ज्यादा का कारोबार प्रभावित हुआ है। हड़ताल के कारण फल-सब्जियों के निर्यात पर करीब 20 से 25 प्रतिशत असर पड़ा है। परचून का करीब 70 प्रतिशत से ज्यादा कारोबार प्रभावित हुआ है।
अनोखा विरोध प्रदर्शन: आज प्रदेश की सीमा पर काले झंडे दिखाकर बजाएंगे हॉर्न
ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के बैनर तले मंगलवार दोपहर 2 बजे ट्रांसपोर्टर्स अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन करेंगे। जिले से सटी मप्र और महाराष्ट्र की सीमा पर ट्रक खड़े कर काले झंडे दिखाएंगे। ट्रांसपोर्ट विरोधी नीतियों के खिलाफ हॉर्न बजाकर आक्रोश जताएंगे। इसको लेकर सोमवार को एसोसिएशन के कुछ पदाधिकारियों ने कलेक्टर प्रवीण सिंह को मांग पत्र भी सौंपा है
10 से ज्यादा ट्रकों में 50 मीट्रिक टन कपड़े का रोजाना होता था निर्यात
बुरहानपुर से रोजाना मुंबई, दिल्ली, राजस्थान सहित अन्य राज्यों में 10 से ज्यादा ट्रकों से करीब 50 मीट्रिक टन कपड़ा निर्यात होता था। हड़ताल के कारण यह ठप हो गया। इससे करीब 8 से 10 करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित हुआ है। पावरलूम में दिन-रात कपड़ा तैयार हो रहा है। साइजिंग और प्रोसेस में फिनिशिंग हो रही है। गठानों की संख्या बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन का भार बढ़ जाएगा। ऐसे में कपड़ा भंडारण को लेकर दोनों ओर समस्या खड़ी हो गई है।
उत्तर भारत में नहीं पहुंच पा रहा केला, 200 ट्रक केले का निर्यात हो रहा था
सीजन होने के कारण जिले से रोजाना 200 से ज्यादा ट्रकों से केले का निर्यात हो रहा था। लेकिन पिछले करीब दो दिन से व्यापारी और ट्रांसपोर्टर्स के नीलामी के बहिष्कार के कारण पूरे उत्तर भारत में केला नहीं पहुंच पा रहा है। एक ट्रक से करीब 1.50 रुपए से ज्यादा का कारोबार होता है। 200 ट्रकों के मान से रोजाना करीब 3 करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार प्रभावित हो रहा है। पिछले तीन दिन से केला मंडी में नीलामी नहीं हो रही है। इससे तीन दिन में 10 करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार प्रभावित हुआ है।
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