कम बारिश का असर: MP के डेढ़ दर्जन से ज्यादा बांध 40 फीसदी तक खाली | bhopal – News in Hindi

कम बारिश का असर: MP के डेढ़ दर्जन से ज्यादा बांध 40 फीसदी तक खाली | bhopal – News in Hindi


मध्य प्रदेश के बांधों में इस बार ज्यादा पानी नहीं भरा है.

मध्य प्रदेश में इस साल अब तक औसत से भी कम बारिश हुई है. इसके चलते बांधों में पानी का भराव नहीं हो पााया है. हालांकि अगस्त के अंतिम सप्ताह व सितंबर में अच्छी बारिश का अनुमान है.

भोपाल. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में अभी भी अगस्त के महीने में सामान्य से 9 से 10 फ़ीसदी बारिश (Rain) कम हुई है. तेज बारिश ना होने से प्रदेश भर के करीब डेढ़ दर्जन बांध 30 से 40 फीसदी खाली हैं. अभी तक केवल 15 से 20 फीसदी जल भराव बांधों में हुआ है. अगस्त महीने के आखिर और सितंबर महीने की शुरुआत में ही बेहतर  बारिश होने से बांधों की फुल टैंक लेवल होने की उम्मीद है. तवा बांध से 60 हज़ार हेक्टेयर ग्रीष्मकालीन फसलों की सिंचाई के लिए पानी दिया गया था. इसके चलते अब उसमें महज 30 फीसदी ही पानी बचा है.

ऐसे में इस बार गर्मी में सिंचाई के लिए पानी मिलना मुश्किल नजर आ रहा है. इंदिरा सागर ओंकारेश्वर बांध की भी यही स्थिति है. यहां से बिजली प्लांट होते हुए लगातार पानी नदियों में बहता रहता है. गुजरात को भी पूरे साल पानी दिया जाता है.

जून में बड़ा था बांधों का जलस्तर
ज्यादातर बांध फुल टैंक लेवल से 3 मीटर से ज्यादा नीचे हैं. प्रत्येक बांधों में 30 फ़ीसदी पानी सिंचाई के लिए आरक्षित किया जाता है. वहीं 20 फीसदी पानी औद्योगिक कार्यों के लिए आरक्षित किया जाता है. बांधों में कई नदियां से पानी आता है बारिश ना होने से नदियों में भी जल का स्तर काफी कम है. बीते 2 माह के अंदर बांधों में 1 से 2 मीटर तक का जलस्तर बढ़ा था. जबकि पिछले साल ज्यादा बारिश होने से काफी तेजी से बांध में जलस्तर बढ़ा था.बांधों में कम जलभराव

साल 2019 में बांधों में जल स्तर इस साल के मुकाबले ज्यादा था. गुना के संजय सागर बांध में अभी तक 30 फीसदी जलभराव हुआ है. जबकि 2019 में 79फीसदी जल भराव था. मंदसौर के गांधी सागर बांध में अभी 28 फीसदी जलभराव है. जबकि साल 2019 में 62फीसदी जलभराव था. सिहोर के कोलार डेम में अभी 35 फीसदी जल स्तर है जबकि साल 2019 में 45 फीसदी जल स्तर था. बालघाट के राजीव सागर में अभी 13 फीसदी जलभराव हुआ है. जबकि साल 2019में 40फीसदी था. रायसेन के बारना में अभी 31 फीसदी जलभराव है. जबकि साल 2019 में 50 फीसदी था.





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