राजगढ2 मिनट पहले
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जिले में कोरोना काल में तमाम तरह के साइड इफेक्ट भी सामने आ रहे हैं। शिक्षा विभाग में भी कोराेना काल में जारी प्रोटोकाल के तहत ऑनलाइन कक्षाएं सरकारी स्कूलों में भी शुरू करवाई गयी हैं, लेकिन कई तकनीकि दिक्कतें शिक्षकों, बच्चों और अभिभावकों को झेलना पड़ रहा है। इनमें सबसे बड़ी परेशानी यह है कि एंड्राइड मोबाइल के माध्यम से जिन कक्षाओं का संचालन होना है, उनके लिए कई बच्चों के पास एंड्राइड मोबाइल की सुविधा नहीं है तो कई गांवाें में नेटवर्क की दिक्कत आ रही है। इस समस्या काे दूर करने के लिए कुछ गांवों में तो शिक्षक शिक्षा का कौना या ओेटला नाम से कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। कक्षा का संचालन करने के लिए गांव के किसी सुरक्षित स्थान या चबूतरे को शिक्षक ने निर्धारित कर लिया है। उस स्थान पर कुछ बच्चे पहुंच रहे हैं, इनमें ऐसे बच्चे होते हैँ जिनके पास मोबाइल की सुविधा नहीं है या नेटवर्क की समस्या है, ऐसे बच्चों को शिक्षक बिठाकर पढ़ाई करवा रहे हैँ। कुछ जगहों पर पड़ाेसी के मोबाइल का भी सहारा लिया जा रहा है। वह ऐसे ही यदि पड़ोस में किसी के पास एंड्राइड मोबाइल है तो दूसरा बच्चा उसके सहयोग से ऑनलाइन पढ़ाई कर रहा है। इस प्रकार गांवों में इस प्रकार की समस्याएं ज्यादा आ रही हैं, खासकर सरकारी स्कूल के बच्चों के साथ।
नेटवर्क की दिक्कत से शिक्षक भी हो रहे परेशान
इधर, कोरोना काल में अब ज्यादातर काम या मीटिंग ऑनलाइन ही हो रही हैं, ऐसे में वे शिक्षक जिनके पास एंड्राइव मोबाइल तो हैँ, लेकिन उन्हंे एप पर मीटिंग करने का अनुभव नहीं है, ऐसे शिक्षक एक दूसरे से यह जानकारी लेकर एप चलाना सीख रहे हैं।
शासन के आदेश का पालन भी जरूरी है
इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी बीएस बिसौरिया का कहना है कि यह सही है कि गांवों में इस तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं, लेकिन शासन के आदेश का पालन जरूरी है, साथ ही कोरोना काल में इस प्रकार के एहतियात भी आवश्यक हैं। भविष्य में जिस प्रकार शासन के आदेश मिलेंगे, उस हिसाब से पढ़ाई करवाई जाएगी।
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