भिंडएक घंटा पहले
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- उत्तरी मप्र के ऊपर चक्रवाती घेरा बनने से जिले में हो रही बारिश, अब तक कुल 356 मिमी बारिश हुई
- रौन-मिहोना में सबसे ज्यादा और लहार में सबसे कम बारिश
सावन का महीना भले ही सूखा बीता हो लेकिन भादो की बारिश ने खरीफ की फसल में जान फूंक दी है। जुलाई महीने के 31 दिनों में जिलेभर में औसत 118 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। वहीं अगस्त के 19 दिनों में ही 171.2 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है यानि जुलाई की तुलना में 53 मिमी ज्यादा बारिश हाे चुकी है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, पूर्वी मध्यप्रदेश के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र अब उत्तरी मध्यप्रदेश के ऊपर आने के बाद चक्रवाती घेरा में तब्दील हो गया है। इससे अगले 24 घंटे में अंचल में अच्छी बारिश की उम्मीद है। बताना होगा कि जिले की औसत बारिश 668 मिमी है, जबकि अब तक 356 मिमी बारिश हो चुकी है। आगे भी अच्छी बारिश की उम्मीद है।
इस साल मानसून समय से आया लेकिन शुरुआती दिनों में बारिश कम होने से किसानों की चिंता बढ़ गई थी। जिले में 30 जून तक 67.1 मिलीमीटर और 31 जुलाई तक मात्र 185 मिलीमीटर औसत बारिश दर्ज की गई जो खरीफ फसल के लिए नाकाफी थी। हालांकि अगस्त महीने के शुरुआती दिनों से ही बंगाल की खाड़ी में बने नए सिस्टम के बाद बादलों ने बरसना शुरू कर दिया और 19 दिनों में जिले में 171.2 मिलीमीटर वर्षा हाे गई जबकि जुलाई के 31 दिनों में मात्र 118 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई थी। अगस्त महीने में हुई अच्छी बारिश से जमीन में नमी आने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं अाैर वे अच्छी पैदावार की उम्मीद लगा रहे हैं।
जून-जुलाई में कम बारिश होने से गिरा धान का रकबा
जून-जुलाई के महीने में कम बारिश होने के कारण जिले में इस साल धान का रकबा घट गया है। कृषि विभाग के अनुसार इस साल जिले में 26 हजार हेक्टेयर में धान रोपी गई है जबकि पिछले वर्ष 30 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में धान की रोपी गई थी। इसी प्रकार से दलहन के रकबे में भी करीब 5 हजार हेक्टेयर की गिरावट आई है।
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