इंदौरएक घंटा पहले
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खजराना गणेश का विशेष श्रृंगार किया गया।
- इस बार मिट्टी और गोबर से निर्मित गणेश जी की प्रतिमाएं पसंद की गई
- सड़कों पर न तो जुलूस निकले और न ही कहीं जयघोष की गूंज सुनाई दी
तेज बारिश के बावजूद शनिवार को गणेशोत्सव की परंपरा कायम रही। न तो कही गणपित बप्पा मोरया की गूंज सुनाई दी और न ही कहीं बप्पा के जुलूस निकले। मंदिरों में पुजारियों ने ही श्रृंगार, अभिषेक और पूजन किया। 10 दिनी महोत्सव में घरों में ही श्रृंगार और पूजन होगा। हस्त नक्षत्र और तुला लग्न में गणेशजी की स्थापना हुई। दिनभर यह सिलसिला चलता रहा।
शहर के रिवर साइड रोड, अन्नपूर्णा, मल्हारगंज, नवलखा, राजेंद्र नगर, पाटनीपुरा और भंवरकुआं, विजय नगर क्षेत्रों में गणेश जी की प्रतिमाएं और पूजन सामग्री खरीदने के लिए बरसते पानी में भी श्रद्धालुओं का उत्साह कायम रहा। शुक्रवार की रात से हुई भारी बारिश शनिवार को भी जारी रही। इसके बावजूद गणेश जी की प्रतिमाएं और पूजन सामग्री खरीदने वालों का उत्साह कम नहीं हुआ। हर वर्ष की तरह इस बार न तो बैंड-बाजों सहित जुलूस निकले और न ही वाहनों में गणेश जी को ले जाते बच्चे और युवा दिखाई दिए।
गणपति बप्पा के जयघोष की गूंज केवल मंदिरों में ही सुनाई दी। लगभग सभी क्षेत्रों में इस बार गणेशोत्सव के परंपरागत पंडाल भी नहीं लगाए गए हैं। घरों और दुकानों में गणेश स्थापना मुहूर्त में हुई। पूजन सामग्री और मिठाई, विशेषकर मोतीचूर के लडडू और मोदक की बिक्री हुई। राजबाड़ा स्थित मल्हारी मार्तंड मंदिर में पगड़ी वाले गणेश जी की स्थापना की गई। वहीं खजराना, बड़े गणेश, जूना गणेश, खड़े गणेश, पोटली वाले गणेश और अन्य सभी प्रमुख मंदिरों में गणेश जी की स्थापना पुजारी एवं प्रबंधकों की मौजूदगी में महाआरती के साथ हुई। अधिकांश घरों में इस बार मिट्टी और गोबर से निर्मित गणेश जी की प्रतिमाएं पसंद की गई।
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