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- Dewas Building Accident; 10 People Safely Rescued In Dewas House Collapse Incident
देवास12 मिनट पहले
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शबाना का इलाज अस्पताल में चल रहा है।
- देवास के स्टेशन रोड स्थित नई आबादी में मंगलवार शाम पाैने 5 बजे तीन मंजिला मकान ढह गया था
- 5 बजे से शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन रात डेढ़ बजे तक चला, भोपाल से आई एनडीआरएफ की टीम
देवास के स्टेशन रोड स्थित नई आबादी में मंगलवार शाम ढहे तीन मंजिला मकान के मलबे में दबने से दो लोगों की मौत हो गई। जबकि 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। रात डेढ़ बजे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन चला। इस हादसे में घायलों ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। मलबे में दबने के बाद कैसे उनकी उम्मीदें टूटती जा रही थीं। रात में रेस्क्यू टीम ने उन्हें एक नई जिंदगी दे दी।

देर रात तक एनडीआरएफ की टीम की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।
घायलाें की जुबानी, बिल्डिंग गिरने की कहानी
शबाना पति फिराेज ने बताया कि मंगलवार काे माेहर्रम की पांच तारीख हाेने पर मैं अपनी मम्मी से मिलने के लिए मायके आई थी। दूसरी मंजिल के हाॅल में मेरी बेटी शालू, मां बस्कर बी, भाई रसीद उर्फ साेनू शेख, भाभी अंजुम बी, उनकी लड़की अलीशा, बड़ी बेटी शिरिन बैठी थी। हम सभी हंसी-मजाक कर रहे थे। भाई की बेटी चाय बनाने के लिए गई थी। हम बात कर रहे थे तभी अचानक भूकंप जैसा झटका आया और हम दब गए। हम सभी बैठे थे। हमें समझ में नहीं आ रहा था क्या करें। गनीमत रही कि छत हमारे ऊपर नहीं आई। बल्कि लकड़ी के टुकड़ाें पर टिक गई। बीच के गेप से हम धीरे-धीरे आगे खिसके और लाेगाें की मदद से बाहर निकल आए।
पैसे देने बाहर आए मकान मालिक और ढहा मकान
इमरान खान ने बताया मुझे पैसे की जरूरत थी। मैंने जाकिर भाई को फोन लगाया मैं स्टेशन रोड पर था। मैंने कहा भाई कहां हो, वह बोले घर पर हूं। मैंने बोला- बाहर निकल कर आओ, मुझे पैसे चाहिए। वह बाहर निकले और मकान गिर गया। उनके पैर में चोट आई।

घायल अल्फेज।
पांच मिनट पहले ही घर में गया था
अल्फेज ने बताया घर के बाहर था और मकान गिरने के पांच मिनट पहले ही अंदर गया था। ग्राउंड फ्लोर पर काेई नहीं था। सभी दूसरी मंजिल के हाॅल में बैठकर आपस में बात कर रहे थे। तभी मकान गिर गया। एक तरफ हाेने से मैं जल्द बाहर निकल आया, मेरे सिर में थाेड़ी चाेट आई। मेरे पिता समेत कुल 4 भाई हैं, जिनके हम 17 भाई-बहन हैं। जाकिर शेख के मकान वाला हिस्सा गिरा, जहां सभी बैठकर बात कर रहे थे।

घायल अंजुम।
मैं चाय नहीं बनाउंगी, यहीं बैठूंगी
अंजुम ने बताया कि बाजी घर पर आई थी ताे मैंने कहा, अभी मैं चाय नहीं बनाउंगी यहीं पर बैठूंगी। हम सभी खुश थे, हंसी-मजाक कर रहे थे। पता ही नहीं चला मकान कैसे गिर गया। मैं संभली ताे देखा मेरे हाथ पर पिल्लर का हिस्सा गिरा था। आसपास में बैठे सभी घबराते हुए धीरे-धीरे बाहर निकले। माेहर्रम की 5 तारीख हाेने से तैयारी कर रहे थे और हादसा हाे गया।

घायल अलीशा
मैं ताे लेटकर माेबाइल चला रही थी, मेरे सिर में लगी
अलीशा ने बताया मैं ताे सबसे ऊपर वाले कमरे में लेटे-लेटे माेबाइल चला रही थी। ऐसा लगा कि कुछ हल-चल हाे रही और छत मेरे ऊपर आकर गिरी, लेकिन साइड में पिलर गिरने से छत उससे टिक गई। मैं घबराकर बाहर आ गई, लेकिन मेरी बड़ी बहन अक्शा नहीं निकल पाई।

घायलों को तत्काल देवास अस्पताल पहुंचाया गया।
दादी-पाेते आपस में मिलकर जानने लगे एक-दूसरे के हाल
जिला अस्पताल में अल्फेज पहले ही उपचार के लिए आ गया था, जिसके सिर में ज्यादा चाेट नहीं आने से वह परिवार के अन्य घायल सदस्याें काे देख रहा था। कुछ देर बाद उसकी दादी बस्कर बी घायल अवस्था में आई, जिनका एक पैर बुरी तरह से घायल हाे गया था। दादी ने पाैते काे अपने पास खड़ा देखा ताे कहने लगी अल्लाह तेरा शुक्र है। फिर अन्य घायलाें के बारे में दादी और पाैते आपस में बात करने लगे। यह नजारा देख आसपास वालाें की आंख में आंसू आ गए थे। बस्कर बी काे ज्यादा चाेट आने से इंदाैर रैफर किया गया। कुछ घंटे बाद आफिया की हालत खराब हाेने पर उसे इंदाैर रैफर किया।

लोगों की मदद से बढ़ा रेस्क्यू ऑपरेशन।
भाई से माेबाइल पर कहा – आहिल मेरी गाेद में है, रेहान घबरा रहा है, उसके बाद संपर्क टूटा
देर रात तक मलबे में 16 साल का किशाेर रेहान, उसके चाचा की 22 साल की लड़की सिमरन और बुआ का डेढ़ साल का बेटा आहिल को बाहर निकाला। मलबे में दबी सिमरन के पास माेबाइल था, जिस पर उसके भाई फैजल ने बात की ताे सिमरन ने बताया आहिल मेरी गाेद में है। राे रहा है। मशीनाें की आवाज से रेहान भी घबरा रहा है। फैजल ने बहन काे कहा- हिम्मत रखना, तुमकाे निकाल लेंगे। यह चर्चा शाम काे हुई थी, उसके बाद संपर्क टूट गया। देर रात सिमरन का माेबाइल लगाया जा रहा था, लेकिन बात नहीं हाे रही थी।

इस प्रकार से जमींदोज हुआ मकान।
इन लाेगाें काे सुरक्षित निकाला
मकान के मलबे से बस्कर बी (55 साल) पति अजीज शेख, आफिया (8 साल) पिता इरशाद उर्फ माेनू शेख, अक्शा (16 साल) पिता जाकिर शेख, अंजुम (40 साल) पति जाकिर शेख, अल्फेज (16 साल) ईरशाद शेख, अलीशा (14 साल) पिता जाकिर शेख, शिरिन (24 साल) पति शहनावज, शबाना (40 साल) पति फिराेज शेख, शिनम (15 साल) पिता रशीद शेख और रेहान (16 साल) काे जिंदा निकाला गया है। बस्कर बी और आफिया काे इंदाैर रैफर किया गया। जबकि सिमरन (23 साल) पिता फिरोज और आहिल (1 साल) पिता आदिल को बचाया नहीं जा सका।

मकान गिरने की जानकारी लगते ही लोग मौके पर पहुंचे।
पांच साल पहले बना था मकान
शहर के लाल गेट के सामने घमंडी हाेटल के पीछे मंगलवार काे जाे 3 मंजिला पक्का मकान ढहा, वह 5 साल पहले ही बना था। इतनी जल्दी पक्का मकान ढहना हैरान करता है। इस मकान के ढहने की वजह नगर निगम की अवैध निर्माण हाेने पर नाेटिस देकर कागजी खानापूर्ति कर एक्शन नहीं लेना है। 2015 में इस मकान के निर्माण के वक्त भी आसपास के लाेगाें ने जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन तक शिकायत की थी। नैसर्गिक नाले काे आगे खिसका कर सरकारी जमीन पर कब्जा करने के आराेप लगे थे, लेकिन नगर निगम ने केवल नाेटिस दिया, काेई कार्रवाई नहीं की। यह हादसा उसी का नतीजा है। दरअसल जहां से नाला जा रहा था, उसे आगे किया गया। इसके लिए मकान के आगे वाले तकरीबन 5 फीट के हिस्से में बीम-काॅलम का सपाेर्ट नहीं दिया और तीन मंजिला मकान खड़ा कर दिया। मकान आगे की तरफ ही ढहा।
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