कमलनाथ ने कहा-जो कर्ज माफी का आरोप लगा रहे हैं वे स्वयं कर्ज माफी के कार्यक्रम में शामिल हुए हैं
कमलनाथ (Kamalnath) ने कहा-जिस राज्य में राजनीति को भाजपा (BJP) ने बिकाऊ बनाया है वहां सब कुछ बिकाऊ है. यह भाजपा सरकार में ही संभव है
उन्होंने कर्ज माफी के मुद्दे पर बीजेपी के आरोपों का जवाब दिया. पेन ड्राइव में कर्ज माफी वाले किसानों के नाम पता और अकाउंट नंबर पार्टी ने जारी कर दिए. कमलनाथ ने आज मीडिया के सामने पेन ड्राइव के जरिए किसान कर्ज माफी की जानकारी दी. उन्होंने कहा- प्रदेश के 26 लाख से अधिक किसानों का हमने कर्ज माफ किया है. मेरे पास इसके प्रमाण पेनड्राइव के रूप में हैं. इसमें उन किसानों के नाम , पते, मोबाइल नंबर, अकाउंट नंबर और कितना कर्जा माफ हुआ है उसकी राशि दर्ज है.मैं मीडिया को भी यह उपलब्ध करा रहा हूं , यह हमारे कर्ज माफी का प्रमाण है. यह भाजपा के झूठ की पोल खोल रहा है.
आरोप लगाने वाले कर्जमाफी कार्यक्रम में थे मौजूद
कमलनाथ ने कहा-जो कर्ज माफी का आरोप लगा रहे हैं वे स्वयं कर्ज माफी के कार्यक्रम में शामिल हुए हैं इसके प्रमाण हमारे पास हैं. भाजपा सिर्फ़ झूठ आधारित राजनीति करती है. वह सिर्फ प्रचार- प्रसार की राजनीति कर प्रदेश की जनता को गुमराह और भ्रमित करने में लगी हुई है. भाजपा ने मध्यप्रदेश में कैसे संविधान और प्रजातंत्र के साथ खिलवाड़ किया है , यह सभी जानते हैं.मध्यप्रदेश में सौदेबाजी और बोली लगाकर जनता की चुनी हुई लोकप्रिय सरकार को गिराया गया है. कमलनाथ ने कहा-जिस राज्य में राजनीति को भाजपा ने बिकाऊ बनाया है वहां सब कुछ बिकाऊ है. यह भाजपा सरकार में ही संभव है.
प्रभारियों को कठिन टास्क
मध्य प्रदेश में 27 विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले कांग्रेस ने इन क्षेत्रों के लिए नियुक्त प्रभारियों के साथ बड़ी बैठक की. कमलनाथ ने कांग्रेस नेताओं को चेताते हुए कहा कि उपचुनाव में कांग्रेस का मुकाबला बीजेपी के मजबूत संगठन से है. चुनाव में अब झंडे बैनर पोस्टर की परंपरा खत्म हो गई है. बूथ स्तर तक जिम्मेदारियां तय करना होंगी. अभी बूथ प्रभारी को मंडल सेक्टर और पन्ना प्रभारियों की जानकारी नहीं है. कमलनाथ ने सभी विधानसभा प्रभारियों को सर्वे रिपोर्ट सौंपी है.कमलनाथ ने सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति तय करने की बात कही है. इस रिपोर्ट की कॉपी सभी प्रभारियों को सौंपी गई है. कमलनाथ ने कहा वो यूपी में विपक्षी पार्टियों का हश्र देख चुके हैं. ऐसे में प्रभारियों को उपचुनाव को लेकर जागना होगा.