For the first time such a disease was found on which pesticides were also neutralized, the soybean crop grazed the sheep | पहली बार ऐसा रोग लगा जिस पर कीटनाशक भी बेअसर, सोयाबीन की फसल भेड़ों काे चराई

For the first time such a disease was found on which pesticides were also neutralized, the soybean crop grazed the sheep | पहली बार ऐसा रोग लगा जिस पर कीटनाशक भी बेअसर, सोयाबीन की फसल भेड़ों काे चराई


हरदा10 मिनट पहले

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हरदा। कुकरावद में ग्रामीणाें की मदद से किसान खेत साफ करते हुए।

  • किसान बाेले- 100% नुकसान, शासन-प्रशासन तुरंत कराए सर्वे, राहत व मुआवजा दें

इस साल फिर साेयाबीन किसानाें के लिए घाटे की फसल साबित हाे रही है। कीट और बीमारी से सोयाबीन की फसल बर्बाद हो गई। अब माैसम साफ हुआ ताे पत्तियां झड़ने लगी हैं। महंगा बीज, खाद और कीटनाशक डालने के बाद भी साेयाबीन खराब हाेने से नहीं बची। अब पूूरी तरह निराश हाे चुके किसान खेत साफ करने के भी मूड में नहीं हैं। एेसे किसानाें ने खेत भेड़ बकरियाें व अन्य मवेशियाेें के हवाले करना शुरू कर दिया है। कहीं-कहीं किसान खेत साफ करने का खर्च बचाने साेयाबीन उखाड़कर फेंक रहे हैं। इधर गुरुवार काे कई गांवाें के किसान पीली, मुरझा व सड़ चुकी फसल के पाैधे लेकर कलेक्टर संजय गुप्ता से मिले। जिन्हाेंने सर्वे की मांग की।

50 साल में पहली बार ऐसा राेग, जिस पर स्प्रे बेअसर : 70 साल के किसान सदाशिव गुर्जर बताते हैं कि वे 20 साल की उम्र से खेती कर रहे हैं। ऐसा रोग पहली बार लगा जिस पर स्प्रे भी बेअसर रहे। यह समस्या जब साेयाबीन पर वैज्ञानिकाें व अधिकारियाें को बताई तो वे यह दलील देने लगे कि खेत में ज्यादा नमी हाेने पर स्प्रे कर दिया हाेगा, इसलिए ऐसा हुआ। किसानाें में इस बात से नाराजी है कि अधिकारियाें की समझाइश व उनके बताए स्प्रे भी कारगर साबित नहीं हाे रहे हैं। फिर भी वे नुकसान मानने काे राजी नहीं हैं। इधर शासन प्रशासन ने अभी तक सर्वे के आदेश नहीं दिए हैं। इससे किसानाें की प्रशासन व सरकार के प्रति नाराजी बढ़ रही है।

कुकरावद में महंगा बीज लेकर 6 एकड़ में साेयाबीन बोई थी, लेकिन नहीं हुआ अंकुरण

कुकरावद के युवा किसान आनंद सेमरे ने बताया कि उन्हाेंने 6 एकड़ में साेयाबीन की बाेवनी की थी। लेकिन ठीक से अंकुरण नहीं हुआ। बाेवनी भी नहीं जमी। ऐसे मेें उन्हाेंने दाेबारा महंगा बीज खरीदकर बुआई की। इसके कृषि विभाग के मैदानी अमले और विशेषज्ञाें द्वारा बताए कीटनाशक का भी स्प्रे किया। लेकिन तने में फंगस लगने से पाैधाें की वृद्धि नहीं हुई।

सेमरे ने बताया कि गुरुवार काे गांव के अन्य किसानाें की मदद से हाथ से ही पाैधे उखाड़कर खेत साफ करना शुरू कर दिया है। गुरुवार काे खेत देखने पहुंचे राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के प्रदेशाध्यक्ष हेमंत टाले व प्रदेश सचिव माेहन सांई ने बताया कि खेत में काेई भी पाैधा एक फीट से ऊंचा नहीं हुआ। पत्तियां झड़ गईं। पाैधाें में फली भी नहीं लगी। जिन पाैधाें में थाेड़ी-बहुत लगी, उनमें तने में फंगस के कारण दाना नहीं बना।

भुवनखेड़ी में 15 दिन पहले तक लहलहा रही थी फसल, अचानक पीली पड़ीं पत्तियां

भुवनखेड़ी के किसान सूरज भारी ने बताया कि उन्हाेंने 13 एकड़ रकबे में जुलाई के पहले सप्ताह में आरबीएस 18 वेराइटी का 6000 रुपए क्विंटल का बीज बाेया था। 15 दिन पहले तक फसल हरी हाेने के कारण लहलहा रही थी। बेहतर उत्पादन की भी उम्मीद थी। लेकिन अचानक पूरे रकबे में पाैधाें की पत्तियां पीली हाेने लगीं। माैसम साफ हाेने पर पत्तियां मुरझाकर झड़ने लगीं।

पत्तियाें पर लगी फफूंद ने प्रकाश संश्लेषण से बनने वाले भाेजन की क्रिया काे पत्तियां पर कवच बनाकर नष्ट करना शुरू कर दिया। इस कारण पाैधे, पत्ती व फलियाें की वृद्धि रुक गई। धीरे-धीरे पाैधे के तने में सड़न लगने से गलने लगी। उन्हाेंने बताया कि खेत साफ कराने में भी प्रति एकड़ 1200 रुपए खर्च आता, इस कारण फसल भेड़, बकरियाें के हवाले कर दी।

प्रशासन काे अपनी रिपाेर्ट भेज रहे हैं

अधिकारियाें व वैज्ञानिकाें की टीम राेज ही गांवाें में किसानाें के बीच पहुंच रही है। फसल का निरीक्षण कर जरूरी उपाय बता रहे हैं। जिस तरह बीमार इंसान धीरे-धीरे ठीक हाेता है, वैसे ही स्प्रे का असर भी दिखेगा। हम प्रशासन काे अपनी रिपाेर्ट भेज रहे हैं।
– एमपीएस चंद्रावत, उप संचालक कृषि, हरदा

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