सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित 60 फीसदी बेड खाली पड़े हैं. . (File Photo)
भोपाल के चिरायु अस्पताल (Chirayu), एलएन मेडिकल कॉलेज (L N Medical college), इंदौर के अरबिंदो इंस्टीट्यूट, देवास के अमलतास अस्पताल और इंडेक्स मेडिकल कॉलेज को एक महीने का एक्सटेंशन दिया गया है. भोपाल के पीपल्स और आरकेडीएफ में 1 सितंबर से कोरोना मरीज़ों का निशुल्क इलाज बंद हो जाएगा.
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक भोपाल के चिरायु अस्पताल, एलएन मेडिकल कॉलेज, इंदौर के अरबिंदो इंस्टीट्यूट, देवास के अमलतास अस्पताल और इंडेक्स मेडिकल कॉलेज को एक महीने का एक्सटेंशन दिया गया है. भोपाल के पीपल्स और आरकेडीएफ में 1 सितंबर से कोरोना मरीज़ों का निशुल्क इलाज बंद हो जाएगा.
मरीज़ों की पसंद प्राइवेट अस्पताल
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक मरीजों की जरूरत के हिसाब से सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त व्यवस्थाएं की गईं हैं लेकिन सरकारी अस्पतालों में संक्रमित मरीज़ इलाज के लिए नहीं जाना चाहते. जब भी एंबुलेंस किसी संक्रमित मरीज के पास पहुंचती है तो मरीज का पहला सवाल होता है किस अस्पताल में उसे भर्ती किया जा रहा है. सरकारी अस्पताल का नाम सुनते ही मरीज एंबुलेंस ड्राइवर से प्राइवेट हॉस्पिटल ले जाने की जिद करने लगता है. मामला जब स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान में आया तो उसके बाद प्रदेश के पांच निजी अस्पतालों का एक्सटेंशन बढ़ाने का निर्णय लिया गया.
सरकारी कोविड केयर सेंटर का हाल
भोपाल की बात करें तो शहर में सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित 60 फीसदी बेड खाली पड़े हैं. राजधानी भोपाल में एम्स और हमीदिया अस्पताल में कुल जनरल और आईसीयू बेड को मिलाकर मात्र 40 फीसदी ही बेड फुल हैं.