The procession of Tajis did not take out in the city, it was taken away from the government vehicle and cooled | नगर में नहीं निकाला ताजियों का जुलूस, सरकारी वाहन से ले जाकर ठंडा किया

The procession of Tajis did not take out in the city, it was taken away from the government vehicle and cooled | नगर में नहीं निकाला ताजियों का जुलूस, सरकारी वाहन से ले जाकर ठंडा किया


झाबुआ20 मिनट पहले

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कोरोना काल के चलते इस वर्ष मोहर्रम के दस दिनों में किसी भी दिन मुस्लिम समाज ने कोई भी सार्वजनिक आयोजन नहीं किया। वहीं चौकी, मेहंदी तथा ताजियों की जियारत सभी कार्यक्रम सोशल डिस्टेंस के साथ संपन्न हुए।
मोहर्रम की नौ व दस तारीख यानी शनिवार-रविवार को मुस्लिम समाज ने रोजा रखा। शनिवार दोपहर बाद ताजिया निर्माण करने वालों के घरों पर ही ताजियों को जियारत के लिए रखा गया। रविवार को मुस्लिम समाज ने यौमे आशुरा मनाया। इस दौरान समाजजन द्वारा घरों पर ही रहकर आशुरा की नमाज व दुआएं आशुरा पढ़ी गई। रविवार को दोपहर बाद समाजजन ने सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ताजिया निर्माण करने वालो के घरों पर पहुंचकर ताजियों की जियारत की।
इस दौरान मन्नतधारियों ने ताजियों के सामने लोट लगाई व नारियल फोड़ा। परंपरागत रूप से हर वर्ष मोहर्रम की दस तारीख की रात को निकलने वाला ताजियों का जुलूस भी इस वर्ष कोरोना संक्रमण को देखते हुए नहीं निकाला गया। रविवार रात में सरकारी वाहन से ताजियों को झाबुआ रोड स्थित नई कर्बला पर ले जाकर ठंडा किया गया।
कोरोना गाइड लाइन का किया पालन, नहीं किए आयोजन
ज्ञात रहे हर वर्ष मोहर्रम पर्व पर मुस्लिम समाज कई सार्वजनिक कार्यक्रम करता है। हर वर्ष सार्वजनिक रूप से ताजियों को जियारत के लिए गढ़ी चौराहे पर रखा जाता है। यहां भारी मजमा रहता है, यहीं मन्नतधारी ताजिये के सामने लोट भी लगाते हैं। वहीं हर वर्ष मोहर्रम की दस तारीख की रात भारी मजमे के साथ यहीं से जुलूस निकालकर ताजियों को ठंडा करने ले जाया जाता है। लेकिन इस वर्ष कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए मुस्लिम समाज ने कोई सार्वजनिक आयोजन नहीं किया।

नगर मे सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करते हुए भोई मोहल्ले में रहने वाला एक कहार परिवार पिछले 7 सालों से मोहर्रम पर ताजिया बना रहा है। परिवार के मुख्य बद्रीलाल कहार ने बताया बहुत सालों पूर्व उनकी तबियत खराब हुई थी, तब उनकी मां ने इमाम हुसैन की मन्नत मानी थी। तब से ही उनकी माता और वो ताजिया बनाते हैं। पूर्व में वह धार जिले राजोद रहते थे, तब वहां ताजिया बनाते थे। 7 साल पूर्व वे यहां रहने आ गए, तब से हर साल यहां भी मोहर्रम पर ताजिया बना रहे हैं।

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