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- Shivraj Singh Chouhan Hamase Darata Hai; Madhya Pradesh Mandi Board Employees Protest Infront Of Vallabh Bhawan At Arera Hills, Bhopal
भोपाल19 मिनट पहले
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मंडी के मॉडल एक्ट के विरोध में भारी हंगामा, वल्लभ भवन घेरने गए कर्मचारियों को पुलिस ने खदेड़ा।
- पुलिस ने सख्ती कर वल्लभ भवन इलाके से विरोध कर रहे मंडी कर्मचारियों को खदेड़ा
- मंडी मॉडल एक्ट के विरोध में कर्मचारियों ने किया हंगामा, धरने पर बैठे
मंडी एक्ट का विरोध कर रहे 1000 से अधिक कर्मचारियों, हम्मालों और तुलावटी कर्मचारियों ने वल्लभ भवन का घेराव करने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें पहले समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माने और नारे लगाते आगे बढ़ने लगे। इसके बाद उन्हें रोकने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। इस पर कर्मचारी पुलिस से उलझ गए और दोनों पक्षों के बीच धक्कामुक्की होने लगी। बाद में पुलिस ने उन्हें वहां से खदेड़ दिया।
मंडी बोर्ड के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वल्लभ भवन तक पहुंच गए थे। बता दें कि वल्लभ भवन में धारा 144 लागू है और यहां पर रैली, प्रदर्शन और विरोध कार्यक्रमों पर पाबंदी है। कर्मचारी नारे शिवराज हम से डरता है। इस विरोध प्रदर्शन में कर्मचारी, अधिकारी, हम्माल, तुलावटी कर्मचारी शामिल हुए। वह सरकार के मंडी मॉडल एक्ट के विरोध में संयुक्त मोर्चा के बैनर तले रैली निकाल रहे थे।
हजारों की संख्या में कर्मचारी-अधिकारी वल्लभ भवन का घेराव करने निकले, लेकिन उन्हें पुलिस ने विंध्याचल भवन के पास बैरिकेडिंग करके रोक दिया है। विरोध प्रदर्शन के दौरान जमकर नारेबाजी हुई। हड़ताल प्रदर्शन कर रहे मंडी कर्मचारियों को भोपाल पुलिस ने आखिर में खदेड़ दिया है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को विंध्याचल भवन के पास रोक दिया, जिससे वह सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। पुलिस ने एक कर्मचारी नेता के साथ की झूमाझटकी भी हुई।

वल्लभ भवन के आसपास धारा-144 लागू, नहीं कर सकते विरोध
पुलिस ने कहा कि अनुमति के बगैर कर रहे थे प्रदर्शन, मंत्रालय के आसपास धारा 144 लागू है। फिर भी कर रहे थे प्रदर्शन.पुलिस ने बार बार समझाया लेकिन प्रदर्शनकारी हट नही रहे थे। इसलिए यहां से उन्हें हटाया गया है। उन्हें प्रदर्शन की अनुमति नही थी।
मंडी कर्मचारियों की मांग
सरकार के मॉडल मंडी एक्ट या अध्यादेश का विरोध कर रहे हैं। उनकी मांग है कि शासन या मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड भोपाल हमारे वेतन, भत्ते, पेंशन तय करें। सरकार की नई व्यवस्था से मंडी कर्मचारियों और अधिकारियों को आर्थिक स्थिति से जूझना पड़ेगा। अभी उनका वेतन मंडियों की आय पर निर्भर करता है।
इन सात प्रावधानों पर कानून में संशोधन किया गया है
- निजी क्षेत्रों में मंडियों की स्थापना हेतु प्रावधान किया गया है।
- गोदामों साइलो कोल्ड स्टोरेज आदि को भी प्राइवेट मंडी घोषित किया जा सकेगा।
- किसानों से मंडी के बाहर ग्राम स्तर से फूड प्रोसेसर, निर्यातकों, होलसेल विक्रेता व अंतिम उपयोगकर्ताओं को सीधे खरीदने का प्रावधान किया गया है।
- मंडी समितियों का निजी मंडियों के कार्य में कोई हस्तक्षेप नहीं रहेगा।
- प्रबंध संचालक मंडी बोर्ड से रेगुलेटरी शक्तियों को पृथक कर संचालक विपणन को दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
- पूरे प्रदेश में एक ही लाइसेंस से व्यापारियों को व्यापार करने का प्रावधान किया गया है।
- ट्रेनिंग के लिए प्रावधान किया गया है।
9 प्रावधानों में से दो पहले से लागू 7 को अपनाया गया
भारत सरकार द्वारा एग्रीकल्चर प्रोड्यूस एंड लाइवस्टोक मैनेजमेंट एक्ट 2017 (आईपीएलएम) मॉडल मंडी अधिनियम राज्यों को भेजकर उसे अपनाने अथवा प्रचलित अधिनियम में संशोधन का विकल्प दिया गया था। अधिनियम को लागू करने के लिए रोडमैप तैयार करने के उद्देश्य से गठित मुख्यमंत्रियों की उच्च स्तरीय समिति ने अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा था कि यदि राज्य अपने मौजूदा मंडी अधिनियम में संशोधन करना चाहते हैं तो उन्हें उसमें आईपीएलएम के प्रावधानों में से कम से कम 7 को शामिल कर संशोधन करना होगा। मध्यप्रदेश में आईपीएलएम के प्रावधानों में से दो प्रावधान पहले से ही लागू हैं।
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