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भोपाल18 घंटे पहले
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उद्यानिकी विभाग में 100 करोड़ की यंत्रीकरण योजना में पॉवर टिलर खरीदने में लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में आर्थिक अनियमितता की पुष्टि हो चुकी है। मंदसौर जिले में 3 करोड़ रुपए के पॉवर टिलर खरीदने के लिए अफसरों ने किसानों के खाते में सीधे पैसा डालने की बजाय कंपनी के खाते में भेज दिया। विभाग और एमपी एग्रो ने जिन कंपनियों से पॉवर टिलर खरीदे हैं, उनका रजिस्ट्रेशन नहीं मिला है। पॉवर टिलर मेड इन चाइना होने के तथ्य सामने आए हैं। लोकायुक्त पुलिस ने अफसरों पर एफआईआर की तैयारी कर ली है। राज्य शासन ईओडब्ल्यू से जांच शुरू करवा सकती है।
लोकायुक्त पुलिस उज्जैन ने मंदसौर और रतलाम जिले में यंत्रीकरण योजना में बंटे पॉवर टिलर की स्टेटस रिपोर्ट मुख्यालय में लोकायुक्त डीजी संजय राणा के पास भेज दी है। केंद्र सरकार पोषित 100 करोड़ की योजना में केंद्र स्तर से 50 करोड़ मिले है। ये प्रारंभिक जांच में साफ हो गया है कि वर्ष 2019-2020 में उद्यानिकी विभाग संचालनालय के निर्देशों पर घोटाला हुआ है। एमआईडीएस योजना में एपी एग्रो या किसी प्रतिष्ठित कंपनी से यंत्र खरीदे जा सकते हैं। पॉवर टिलर के लिए नियमानुसार किसानों को 50 प्रतिशत राशि सबसिडी बतौर मिलना थी। यह डीबीटी में किसान के खाते में डाली जाना चाहिए। मंदसौर के विकासखंड मल्हारगढ़, सीतामऊ, भानपुर में किसानों के बयान में पता चला कि उनके खाते में राशि नहीं दी गई। किसान के पास सीधे कंपनी वाले पहुंचे और 75 हजार रुपए की रसीदें सौंप दी गई। इस दौरान उद्यानिकी डॉयरेक्टर कालीदुरई थे, जबकि योजना के नोडल अफसर राजेंद्र कुमार राजौरिया थे। जिला अफसरों ने बताया कि राजौरिया के निर्देश पर भुगतान हुआ है। लोकायुक्त ने अब तक वर्तमान संचालक पुष्कर सिंह को रिकॉड देने के लिए तीन नोटिस थमाए है।
रजिस्टर्ड नहीं मिली कंपनी, जिग्नेश पटेल तलब
जांच में ये पाया गया है कि पॉवर टिलर छत्तीसगढ़ की कंपनी कृषि क्राफ्ट के माध्यम से खरीदे गए हैं। ये सारी खरीदी तीन एजेंसियों छत्तीसगढ़ इंटरप्राइजेस, गणेश ट्रेडिंग कंपनी और जेएम इंटरप्राइजेस से हुई है। इनका कर्ताधर्ता जिग्नेश पटेल है। इन तीनों कंपनियों का रजिस्ट्रेशन कंपनी एक्ट में नहीं मिला है। इनका जीएसटी भी नहीं है। इन्हें सहकारिता संस्था बताया गया है। लोकायुक्त ने पटेल को 10 सितंबर को दस्तावेजों के साथ तलब किया है।
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