From the small line gate intersection to Damohnaka, the left hand was swallowed by the temporary occupants, the left eye curved | छोटी लाइन फाटक चौराहे से लेकर दमोहनाका तक लेफ्ट टर्न को अस्थायी कब्जों ने निगला, बायें किनारों पर टेढ़ी नजर

From the small line gate intersection to Damohnaka, the left hand was swallowed by the temporary occupants, the left eye curved | छोटी लाइन फाटक चौराहे से लेकर दमोहनाका तक लेफ्ट टर्न को अस्थायी कब्जों ने निगला, बायें किनारों पर टेढ़ी नजर


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जबलपुर19 घंटे पहले

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  • कोरोना काल में भी चौराहों से निकलना आसान नहीं, जहाँ कुछ सहजता से निकल सकते हैं वहीं जाम

शहर के चौराहों पर पिछले कुछ सालों में जितने भी लेफ्ट टर्न बनाये गये अब ये टर्न पूरी तरह से अस्थायी कब्जों के हवाले हैं। ऐसे लेफ्ट टर्न जिनको मुक्त कराने में नगर निगम को करोड़ों रुपए भी खर्च करना पड़े वे भी किसी तरह से अतिक्रमणों से बचे नहीं हैं। कोरोना काल में जब चौराहों पर ज्यादा भीड़ हालातों को खतरनाक बना सकती है उस समय में भी ऐसे बायें किनारों से निकलना आसान नहीं है। छोटी लाइन फाटक, दमोहनाका, रानीताल जैसे अमूमन सभी चौराहों के लेफ्ट टर्नों में कब्जों के साथ हालात एकदम बदतर होते जा रहे हैं।

किसी तरह से इनसे निकलने के दौरान नहीं लगता है कि थोड़ा सहजता महसूस हो रही है। बस बदइंतजामी और अतिक्रमण की होड़ इन चौराहों खासकर बायें किनारों को नर्क से बदतर बना देती है। चौराहों के लेफ्ट टर्न में लोग सहयोग करें, अस्थायी कब्जा न करें तो आसानी हो सकती है, पर जिम्मेदार ध्यान देने तैयार नहीं और कब्जा करने वाले अच्छे शहरी का परिचय देने तैयार नहीं हैं।

कोरोना काल में चौराहों पर ज्यादा भीड़ न लगे, ट्रैफिक सहज हो इसको लेकर नगर निगम का अतिक्रमण विभाग कोई कार्रवाई ही नहीं कर रहा है। चौराहों पर जैसे भीड़ को और बढ़ावा दिया जा रहा है ऐसे हालात हैं।

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