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- When The Season Came, The Larvae Investigation Campaign Got Frustrated, Teams Were Moving From House To House In Summer
जबलपुर21 घंटे पहले
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- इन्हीं दिनों मलेरिया, डेंगू के मरीज बढ़ते हैं, न तो निगम करा रहा जाँच न ही मलेरिया शाखा
अगस्त, सितम्बर और अक्टूबर की तिमाही में मच्छर जनित बीमारियाँ तेजी से फैलती हैं और इनमें सबसे अधिक मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया के मरीज शामिल होते हैं। इसकी रोकथाम के लिए सबसे जरूरी होता है बंद कूलरों की जाँच। बंद कूलरों में बचा हुआ पानी सबसे घातक माना जाता है जिसमें मच्छर पैदा होते हैं और उसके बाद वे घर के अंदर घुसकर हमला कर देते हैं।
डेंगू के मच्छर घरों के अंदर ही पैदा होते हैं जिससे ये वहाँ रहने वालों के लिए जानलेवा बन जाते हैं। दो साल पहले शहर में जिस तेजी से डेंगू और चिकनगुनिया ने कहर ढाया था वह अभी भी भुलाया नहीं जा सका है। नगर निगम और मलेरिया विभाग भी उस आपदा को भूला नहीं है इसलिए तो हर साल मच्छरों के लार्वा की जाँच का अभियान चलाया जाता है लेकिन इस बार तो कुछ ही दिनों में यह अभियान फुस्स हो गया।
शहर के नागरिकों को सुरक्षित रखना है तो हर मामले में अधिकारियों को ध्यान देना होगा। मच्छर जनित बीमारियां भी कोरोना से कम खतरनाक नहीं हैं। वर्ष 2018 में जब डेंगू ने कोहराम मचाया था तब शहर के कम से कम 1 लाख लोग इससे पीड़ित हुए थे, भले ही यह आँकड़ा अधिकारिक नहीं है लेकिन चिकित्सक इसे सही मानते हैं। इनमें डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया बीमारी शामिल थी।
चिकनगुनिया को लंगड़ा बुखार के नाम से प्रचारित किया गया था। इन बीमारियों के लिए बारिश समाप्त होने वाला यह मौसम ही सबसे मुफीद है। इन दिनों बारिश का पानी हर जगह भरा रहता है चाहे वह छत पर रखा नारियल का खोल हो, पुराना टायर हो, गमला हो, प्लास्टिक का डिब्बा हो, या कोई भी पुराना बर्तन। इससे भी अधिक खतरनाक होता है कूलर, गर्मी समाप्त होने के बाद अधिकांश लोग बारिश में कूलर लगे ही रहने देते हैं और उसमें पानी भरा रह जाता है जिसमें मच्छर लार्वा देते हैं और मच्छर घरों के अंदर आ जाते हैं।
हर नागरिक को होना पड़ेगा सावधान
नगर निगम भले ही घर के बाहर कितना भी कीटनाशक छिड़क दे, फॉगिंग का धुआँ कर दे लेकिन जब तक हर नागरिक अपने घर के अंदर ठीक से जाँच नहीं करता है कि कहीं लम्बे समय से किसी सामग्री में पानी तो नहीं भरा है, कूलर सूखा है या नहीं, दीवारों में अधिक सीलन तो नहीं है, छतों पर कहीं भी पानी न भरा हो, घरों के आसपास पानी का जमाव न हो तब तक कोई भी सुरक्षित नहीं है। यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है। डेंगू का मच्छर बहुत अधिक दूरी तक नहीं उड़ता है और आम तौर पर घरों के अंदर ही पैदा होता है, यानी आपका पाला हुआ मच्छर आपको ही डसेगा।
अगस्त में निगम ने चलाया था अभियान
नगर निगम और मलेरिया शाखा ने अगस्त माह में लार्वा की जाँच का अभियान चलाया था। इस दौरान कई सरकारी कार्यालयों तक में लार्वा मिले थे, अस्पतालों में भी यही हाल था जिसके बाद जुर्माने की कार्रवाई की गई थी। अब देखने में आ रहा है कि यह अभियान लगभग बंद कर दिया गया है। यह जरूर है कि निगम मच्छरों को मारने के लिए कीटनाशकों का छिड़काव करा रहा है, फॉगिंग का धुआं करा रहा है लेकिन लार्वा की जांच नहीं हो रही है जबकि यह समय सबसे कठिन है और खासकर कोराेना के कारण तो बड़ी मुसीबत है क्याेंकि अस्पताल भरे हुए हैं।
और तेज करेंगे जांच
^मच्छरों को मारने का अभियान तो चल ही रहा है साथ ही लार्वा की भी जाँच कराई जा रही है लेकिन इसमें और तेजी लाई जाएगी। जिन टीमों से सेनिटाइजेशन और सफाई का कार्य कराया जा रहा है उसी से लार्वा की जाँच भी कराई जाएगी ताकि लोगों को मच्छर जनित बीमारियों से बचाया जा सके।
भूपेन्द्र सिंह, स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम
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