दतिया17 घंटे पहले
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- कई सालों टूटे हुए पड़े रहते हैं जाल, गलियों में रहता है गिरने का डर
दतिया शहर के 36 वार्डों में घनी आबादी के बीच नालियों पर डले लोहे के जाल जीर्णशीर्ण हो गए हैं। रिंग और पतली किनारी वाले लोहे के जाल टूटने से न केवल वाहनों के पंचर होने का डर रहता है बल्कि पैर फिसलने और फंसकर टूटने का भी डर रहता है। खास बात यह है कि इन टूटे हुए जालों को बदलवाने की जिम्मेदारी नगर पालिका के इंजीनियरों की है लेकिन इंजीनियर जाल बदलवाना तो दूर वार्डों में भ्रमण करने तक नहीं जाते हैं। यही कारण है कि हर दूसरी गली में टूटे हुए जाल पड़े हैं।
वैसे तो शहर के जाल बदलने के नाम पर नगर पालिका में हजारों का घालमेल होता है। जाल डलता एक क्विंटल का है और पेमेंट 10 क्विंटल के जाल का होता है। इसके आरोप पहले भी परिषद के सम्मेलनों में पार्षद भी लगा चुके हैं। साथ ही जो जाल डाले जाते हैं वे बेहद घटिया क्वालिटी के रहते हैं। इसका जीता जागता उदाहरण बड़ी तिगैलिया पर दो महीने में बदले गए दो जाल हैं।
छह महीने से ज्यादा समय में बड़ी तिगैलिया का जाल बदला गया और एक महीना भी नहीं हुआ था कि रेत का ट्रैक्टर निकलते वक्त उसमें फंसा और जाल फिर टूट गया। 15 दिन तक लोग लोहे के टूटे हुए जाल से बचते हुए निकलते रहे। आखिरकार ट्रैफिक पुलिस ने वहां बेरिकेड्स रख दिया। इसी सप्ताह नगर पालिका ने जाल को बदलवाया। इसी तरह शनिचरा मोहल्ला में महज पांच फीट का जाल जिस हालत में है इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है।
इंजीनियर तैनात किए फिर भी नहीं होती मरम्मत
नगर पालिका में इंजीनियर तैनात हैं। वार्ड के जनप्रतिनिधि टूटे हुए जाल के लिए नगर पालिका में आवेदन देते हैं। इसके बाद इंजीनियर की जिम्मेदारी होती है कि वह मौके पर जाकर देखे और इस्टीमेट बनाकर फाइल को आगे बढ़ाए। चूंकि छोटे-छोटे निर्माण कार्यों के भुगतान के अधिकारी सीएमओ को हैं इसलिए टैंडर आदि की भी समस्या नहीं रहती है। 10 से 15 दिन में काम हो जाना चाहिए लेकिन यहां महीनों नहीं बल्कि सालों सिर्फ एक जाल बदलवाने में लग जाते हैं।
इन मोहल्लों में टूटे पड़े है रोड पर जाल, रोज होते हैं हादसे
वैदों वाली गली में, होलीपुरा, रिछरा फाटक मानस गली, शिवगिर मार्ग, भदौरिया की खिड़की, पुराने फिल्टर के नीचे, शनिचरा मोहल्ला, रिसाला मंदिर, भदौरिया की खिड़की, चूनगर फाटक, तलैया मोहल्ला, भरतगढ़ मोहल्ला, बम बम महादेव आदि जगहों पर नालियों पर डले जाल टूट चुके हैं। जाल या तो नाली में नीचे घुस गए हैं या फिर बीच से टूटकर डैमेज हो गए हैं। इन टूटे जाल पर निकलना खतरा भरा होता है। पैर फंसने का डर रहता है। साथ ही वाहन के पंचर होने की संभावना रहती है।
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