भोपाल27 मिनट पहले
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भोपाल में सुसाइड करने वाले विक्रम ने एक इमोशनल वीडियो बनाकर परिजनों को भेजा। – फाइल फोटो
- भेल कॉलेज की सभी सीट भर जाने के कारण मानसिक तनाव में था
- पढ़ाई के साथ जॉब भी करता था, पांच भाई बहनों में चौथे नंबर का था
भोपाल में बी कॉम फाइनल ईयर के एक छात्र ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। फांसी लगाने के पहले उसने एक इमोशनल वीडियो बनाकर भी परिजनों को भेजा। इस वीडियो में उसने दिल के आकार के चित्र बनाकर उसमें मम्मी, पापा, भाई और बहन को आई लव माई फैमिली लिखा। वीडियो मिलते ही परेशान परिजनों ने उसे फोन किया, लेकिन उसने कहा कि उनकी याद आ रही है। बस इतना ही है। बात होने के बाद उसने फांसी लगा ली। वह भेल कॉलेज में सीट फुल जाने के कारण भी मानसिक तनाव में था।

इस तरह का एक वीडियो बनाकर विक्रम ने परिजनों को भेजा।
मूलत: बैरसिया निवासी 24 वर्षीय विक्रम अहिरवार बीडीए कॉलोनी अवधपुरी में किराए के फ्लैट में रहता था। बैरसिया में रहने वाले उसके भाई राज करण ने बताया कि विक्रम बी.कॉम फाइनल ईयर में था। उसने 12 सितंबर की रात करीब 11 बजे एक वीडियो भेजा था। इसमें उसने दिल का कोई टुकड़ा कभी गाना लगाकर उसमें मम्मी, पापा, भाई और बहन को आई लव माई फैमिली लिखकर भेज दिया था।
फोन बोला बस याद आ रही
मैंने उसे फौरन फोन लगाया। वह बोला कि उसे सभी की याद आ रही है। बस ऐसे ही भेज दिया। वह हमेशा कोई न कोई वीडियो भेजता रहता था। ऐसे में हमें ज्यादा संदेह नहीं हुआ। मैंने भी ध्यान नहीं दिया। मंगलवार दोपहर बाद उसके फांसी लगाने की खबर अवधपुरी पुलिस ने दी। उसने कभी कोई परेशानी का जिक्र नहीं किया।
भेल कॉलेज की सीट फुल होने से तनाव था
उसने कहा था कि भेल कॉलेज में एम कॉम की सभी सीटें फुल हो गई हैं। इस पर हमने उससे कहा था कि कोई परेशानी नहीं है। जो भी मिल जाए, ले लेना। वह अपने काम से काम रखता था। इसी साल परिजन उससे उसकी छोटी बहन की शादी करने के बारे में विचार कर रहे थे। वह परिजनों को खेती के लिए ट्रेक्टर लेने के लिए कहता रहता था।
पढ़ाई के साथ नौकरी करता था
विक्रम यहां पर अकेला रहता था। वह बिजली कॉलोनी में चौकीदारी करता था। वह पी जी कोर्स करने के लिए तैयारी कर रहा था। उसने एडमिशन की बात को लेकर परिजनों से चिंता भी जाहिर की थी। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। मौके पर पुलिस को कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पुलिस ने मृतक का मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है।
15 दिन पहले ही भोपाल आया था
राज ने बताया कि अभी तक वह घर पर ही था। एक सितंबर को वह पीजी का फार्म भरने का कहकर बैरसिया से भोपाल आ गया था। पापा ने उसे पैसे भी दिए थे। अब इस बीच क्या हो गया। उन्हें तो समझ ही नहीं आ रहा।
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