पारुल ने 2013 के चुनाव में गोविंद राजपूत को हराया था
सुरखी (Surkhi) सीट के लिए अभी बीजेपी-कांग्रेस दोनों ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है. लेकिन पारुल साहू (Parul Sahu) और गोविंद राजपूत का नाम तय माना जा रहा है. लेकिन इस बार ये पुराने प्रतिद्वंद्वी दल बदल कर आमने-सामने होंगे.
पारुल साहू ने गुरुवार देर रात पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से मुलाकात की थी.उस मुलाकात के बाद तय हो गया था कि वो कांग्रेस में जा रही हैं. 2013 के विधानसभा चुनाव में पारुल साहू ने कांग्रेस के गोविंद सिंह राजपूत को 141 वोटों से हराया था. बावजूद इसके बीजेपी ने 2018 के चुनाव में पारुल साहू का टिकट काट दिया था. 2018 के चुनाव में गोविंद सिंह राजपूत कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा में पहुंचे थे. लेकिन अब गोविंद सिंह राजपूत दल बदल कर बीजेपी में शामिल हो गए हैं और शिवराज मंत्रिमंडल में परिवहन विभाग जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.
गोविंद राजपूत को देंगे चुनौती
गोविंद सिंह राजपूत के बीजेपी में शामिल होने के बाद से भाजपाइयों की नाराजगी की चर्चा जमकर आ रही थी. इस बीच पारुल साहू ने दल बदल लिया. खबर इस बात को लेकर है कि पारुल साहू की कमलनाथ से सुरखी की विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने को लेकर चर्चा हुई है. वो सागर की सुरखी विधानसभा सीट पर मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ कांग्रेस की उम्मीदवार हो सकती हैं.अरसे से बीजेपी से नाराज़ हैं पारुल
पारुल साहू बीजेपी से नाराज़ चल रही थीं.इससे पहले भी वो सोशल मीडिया के जरिए अपनी नाराजगी जताती रही हैं. अब यह तय माना जा रहा है कि पारूल साहू सुरखी विधानसभा सीट से मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरेंगी. खबर इस बात को लेकर है कि पार्टी से नाराज पारुल साहू ने गुरुवार शाम को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की थी लेकिन आम सहमति नहीं बनने के बाद देर शाम वो पीसीसी चीफ कमलनाथ से मिलने चली गयीं और कांग्रेस में शामिल होने का मन बना लिया.
दूसरी सूची का इंतज़ार
अब यह तय माना जा रहा है कि सुरखी विधानसभा सीट पर पुराने प्रतिद्वंदी के बीच एक बार फिर मुकाबला होगा लेकिन इस बार दोनों दल बदल कर नये दल में खड़े दिखाई देंगे. सब कुछ ठीक रहा तो कांग्रेस की दूसरी सूची में सुरखी विधानसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर पारुल साहू का नाम घोषित हो जाएगा.