Father dies due to Corona’s incorrect report, uncle also dies in shock of not giving mud to brother, negative in investigation | कोरोना की गलत रिपोर्ट से पिता की मौत, भाई को मिट्टी न दे पाने के सदमे में चाचा भी चल बसे, पड़ताल में निकले निगेटिव

Father dies due to Corona’s incorrect report, uncle also dies in shock of not giving mud to brother, negative in investigation | कोरोना की गलत रिपोर्ट से पिता की मौत, भाई को मिट्टी न दे पाने के सदमे में चाचा भी चल बसे, पड़ताल में निकले निगेटिव


  • Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Father Dies Due To Corona’s Incorrect Report, Uncle Also Dies In Shock Of Not Giving Mud To Brother, Negative In Investigation

नागदा20 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

अकबर खान

  • प्रशासनिक असंवेदनशीलता की कीमत चुका रहे शहर के परिवार की कहानी
  • बिना मतलब प्रशासन ने 10 दिन कर दिया परिवार को क्वारेंटाइन

कोरोना संक्रमण की गलत रिपोर्ट ने नागदा के एक परिवार की हंसती-खेलती गुलजार जिंदगी में मातम पसार दिया है। स्वास्थ्य व प्रशासनिक अमले की लापरवाही की इतनी बड़ी कीमत इस परिवार ने चुकाई की मात्र चार दिनों के भीतर कुनबे के दो-दो सरपरस्त अल्लाह को प्यारे हो गए। गुरुवार को मंडी थाने पहुंची शिकायत में मामला उजागर हुआ है। शिकायतकर्ता ने सप्रमाण प्रशासनिक चूक को उजागर कर संबंधित दोषियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। मामला इसलिए भी संगीन है, क्योंकि परिवार में दो मौत के बाद भी अपने ही अपनों को ढांढस तो दूर, सुपुर्दे खाक हुए अपने सरपरस्तों की कब्र पर दो मुट्ठी मिट्टी देकर दुआएं मगफिरत ही पढ़ पाएं।

बेटे अशफाक ने कहा- उज्जैन में सुपुर्दे खाक करने से आखिरी बार परिजन अब्बा का चेहरा तक नहीं देख सके
मेरे अब्बा अकबर पिता कल्लन खान हार्ट पेशेंट थे। 21 जुलाई को उन्हें सांस लेने में परेशानी और घबराहट की शिकायत पर मेरा छोटा भाई जिशान अब्बा को शहर के मनोहर वाटिका स्थित चौधरी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर लेकर पहुंचा। डॉ. सुनील चौधरी परिवार के फैमिली डॉक्टर है।

बावजूद डॉ. चौधरी ने उपचार करने से इनकार कर दिया। काफी गुहार लगाने के बाद एक्स-रे और ईजीसी करने पर डॉक्टर ने कहा कि उन्हें निमोनिया है। 99 प्रतिशत कोरोना से संक्रमित होने की शंका जाहिर कर सरकारी अस्पताल रैफर कर दिया। सरकारी अस्पताल पहुंचते ही अब्बा का सैंपल लेने के बाद दो घंटे तक भर्ती रखा, इसके बाद माधवनगर सरकारी अस्पताल रैफर कर दिया। अगले दिन 22 जुलाई की रात 1.20 पर प्रशासनिक अमला हमारे नागदा स्थित घर पहुंचा और मुझे बताया कि आपके पिता की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव है। ताबड़तोड़ प्रशासन ने घर और उसके आसपास का एरिया सील कर कंटेनमेंट क्षेत्र घोषित कर दिया। दूसरे दिन 23 जुलाई की सुबह 9.15 पर जब मैंने अब्बा के मोबाइल पर कॉल किया तो ड्यूटी डॉक्टर ने बताया कि आपके पिता की मौत हो चुकी है।

कोरोना संक्रमित होने से अब्बा को उज्जैन में ही तीन परिजन की मौजूदगी सुपुर्दे खाक कर दिया। परिवार के अन्य लोग, रिश्तेदार, जाति, बिरादरी के साथ मेरे चाचा भी गमी में शामिल नहीं हो पाए। न ही अब्बा का आखरी बार चेहरा ही देख सके। इसके ठीक चार दिन बाद बड़े भाई से न मिल पाने के गम में झालावाड़ निवासी मेरे चाचा वहीद खान भी चल बसे। न तो उनका परिवार हमारे यहां आ पाया, न हमारा परिवार वहां मातपुरसी के लिए पहुंच सका, क्योंकि शासन की गाइडलाइन के अनुसार हम कटेंनमेंट जोन में थे। यानी की अछूत..। इसलिए गम में डूबे परिवार को किसी का ढांढस पाने का भी हक नहीं था।

पुलिस कंट्राेल रूम से पहुंचे कॉल ने ली मेरे पिता की जान
पुलिस शिकायत में अशफाक ने अब्बा की असमय मौत के लिए पुलिस कंट्रोल रूम से पहुंचे कॉल को जिम्मेदार ठहराया है। अशफाक के अनुसार 22 जुलाई की रात 10.49 पर अब्बा के मोबाइल पर कॉल कर कंट्रोल रूम से 9 मिनट 42 सेकंड बात की गई। जबकि उस समय उनके अब्बा आईसीयू में होकर ऑक्सीजन पर थे। कंट्रोल रूम से बात करने वाले पुलिसकर्मी ने ही अब्बा को पॉजिटिव बताकर उन्हें मानसिक अवसाद में पहुंचाया। इससे हार्ट अटैक आया। जबकि 22 जुलाई को स्वास्थ्य अमले की रिपोर्ट में उनके पिता की रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इसकी पुष्टि स्वयं डॉ. सोनानिया ने की और लिखित रिपोर्ट भी हमें उपलब्ध कराई।

बंधक बनाया, न राशन का पूछा, न घर को सैनिटाइज किया
रिपोर्ट में अशफाक ने स्वास्थ्य महकमे सहित स्थानीय प्रशासनिक अमले पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। अशफाक के अनुसार घर को सील करने के बाद प्रशासन ने एक भी बार घर और आसपास के क्षेत्र को एक बार भी सैनिटाइज नहीं कराया। परिवार को घर में बंधक बनाने के बाद भी किसी ने यह तक नहीं पूछा कि राशन, पानी का इंतजाम है कि नहीं। यहां तक कि पड़ोसियों और रिश्तेदारों को खाद्य सामग्री पहुंचाने से रोका गया। इससे ही साबित होता है कि प्रशासन को पता चल गया था मेरे पिता की रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं निगेटिव थी।

दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और दर्ज हो हत्या का केस
शिकायत में अशफाक ने पुलिस कंट्रोल रूम से उनके पिता को कॉल करने वाले पुलिसकर्मी के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करने व प्रशासनिक लापरवाही करने वाले दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।

0



Source link