Leena wrote, Reena went to discharge, she said – not just a patient with this name, but the patient is not ready to be admitted here | लीला काे लिखा रीना, डिस्चार्ज कराने गए तो बोले- इस नाम का मरीज ही नहीं, बदइंतजामी इतनी की मरीज यहां भर्ती होने को तैयार नहीं

Leena wrote, Reena went to discharge, she said – not just a patient with this name, but the patient is not ready to be admitted here | लीला काे लिखा रीना, डिस्चार्ज कराने गए तो बोले- इस नाम का मरीज ही नहीं, बदइंतजामी इतनी की मरीज यहां भर्ती होने को तैयार नहीं


  • Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Indore
  • Leena Wrote, Reena Went To Discharge, She Said Not Just A Patient With This Name, But The Patient Is Not Ready To Be Admitted Here

इंदौर8 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

परिजन का कहना है अस्पताल बाहर से जितना स्वच्छ है, अंदर उतनी ही गंदगी है।

  • लगातार मौतों के बाद भी एमटीएच में हालात नहीं बदल रहे
  • परिजन का आरोप… जरूरत पर भी ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं दे रहे

(सुमित ठक्कर) शाजापुर से आई महिला कोविड अस्पताल एमटीएच के गेट पर सुरक्षाकर्मी से विवाद कर रही थीं। वह कह रही थी एक बार पीपीई किट पहनाकर उसे बच्ची को देखने दो। चार दिन से अस्पताल में भर्ती है, लेकिन ये पता नहीं चल रहा कि उसकी तबीयत कैसी है। सुरक्षाकर्मी राजी नहीं हुआ, महिला गुहार लगाते-लगाते रोने लगी। कुछ लोग दिलासा देने आए तो बोली- स्टाफ सिर्फ ये बता रहा कि इलाज चल रहा है, ठीक हो रही या नहीं, डिस्चार्ज कब करेंगे, कोई नहीं बताता।
यह दृश्य था शनिवार को महाराजा तुकोजीराव अस्पताल (एमटीएच) के बाहर का। अस्पताल में लगातार हो रही गड़बड़ियों के बीच शुक्रवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें मरीज की मौत हो गई, पर परिजन को पता ही नहीं चला। कमोबेश ये स्थिति यहां भर्ती हर मरीज के साथ है। सबकी शिकायत है कि एमटीएच में लापरवाहियां चल रही हैं, कोई सुनने-ध्यान देने वाला नहीं है। लगभग 450 बेड क्षमता वाले महाराज तुकोजीराव अस्पताल (एमटीएच) में 9 डॉक्टर और 100 नर्स का स्टाफ है। बावजूद यहां इतनी बदइंतजामी है कि कोई मरीज भर्ती होने को तैयार नहीं है।

आपबीती 1… गंभीर बता 32 हजार के इंजेक्शन बुलवा लिए, कुछ देर ऑक्सीजन देकर हटा लेते हैं
भाजपा से पार्षद का चुनाव लड़ चुके 60 वर्षीय शख्स के बेटे ने बताया कि पिता का ऑक्सीजन लेवल 90 से नीचे चला जाता है, तब ऑक्सीजन मिलती है। कुछ देर ऑक्सीजन लगाकर डॉक्टर हटा भी देते हैं। नर्स से कहा तो वह बोली हम कुछ नहीं कर सकते। एक दिन गंभीर हालत बताकर अरबिंदो अस्पताल से 32 हजार का इंजेक्शन बुलवाया। अस्पताल के स्टाफ पर भरोसा नहीं था, इसलिए किट पहनकर खुद भीतर गए और पिता की जेब में रखकर आए। यहां कई बार ऐसी दवाएं बाहर से बुलवा लेते हैं, जिसकी मरीज को जरूरत ही नहीं होती।

आपबीती 2… जी घबरा रहा है, यहां से ले चलो
बुरहानपुर के गुप्ता परिवार की कहानी तो और व्यथित करने वाली है। अस्पताल के बाहर बैठी उनकी पत्नी ने बताया, पति ने सुबह फोन पर कहा कि इस अस्पताल में जी घबरा रहा है, चाहे जो हो जाए, मुझे यहां से निकाल लो। बाथरूम में साफ-सफाई नहीं होती, पूरे वार्ड में बदबू से मरीज परेशान हैं। उन्हें 2 घंटे से टॉयलेट जाना है, लेकिन कोई कर्मचारी ले जाने को तैयार नहीं। इस पर महिला ने स्टाफ को कहा तो थोड़ी देर बाद नर्स बाहर आई और उनसे टॉयलेट पॉट खरीदकर लाने को कहा। महिला बेटे को मंदिर की सीढ़ियों पर बैठाकर दवा बाजार से टॉयलेट पॉट लाई। इसके बाद कर्मचारी उन्हें टॉयलेट लेकर गए।

आपबीती 3… फोन करके कहा- मुझे यहां से शिफ्ट करा लो, कुछ घंटे बाद ही मौत
गोटू महाराज की चाल में रहने वाली 72 वर्षीय लीलाबाई राणा का मामला भी ऐसा ही है। बेटी ज्योति और नाती सूरज राणा ने आरोप लगाया कि उन्हें ब्लड प्रेशर व शुगर की तकलीफ थी। सांस लेने में दिक्कत आई तो चरक अस्पताल ले गए। यहां से बीमा अस्पताल रैफर किया। वहां सीटी स्कैन में कोरोना के लक्षण दिखे तो रात को एमटीएच अस्पताल में भर्ती कराया।

यहां कम्प्यूटर में उनका नाम लीला की जगह रीना लिख दिया। रात 2 बजे उनसे बात हुई तो वे बोलीं कि यहां कोई सुविधा नहीं है, जल्दी शिफ्ट कर दो और रो पड़ीं। सुबह बेटे धर्मेंद्र के साथ वहां गए तो अस्पताल वालों ने साफ इनकार कर दिया कि लीला बाई नाम की कोई मरीज नहीं है। हंगामा किया तो बोले 450 मरीज हैं, कैसे ढूंढें? बड़ी मुश्किल से दूसरी मंजिल पर मिलीं। तब खुलासा हुआ कि रिकॉर्ड में नाम रीना दर्ज हो गया है। इसके बाद डिस्चार्ज तो नहीं करवा सके, पर कुछ घंटे बाद गंभीर बताकर मौत की सूचना दे दी।

0



Source link