नागदा5 घंटे पहले
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- 1979 में चंबल किनारे और नाग दाह टेकरी पर उत्खनन में डाॅ. वाकणकर काे मिले थे साक्ष्य, पुस्तक में किया है जिक्र
हमारा शहर नागदा सिर्फ महाभारतकालीन नहीं है, बल्कि अश्मयुगीन यानी आदिमानव युग से सभ्य मानव जीवन की शुरुआत का जनक भी है। लगभग 40 हजार साल पहले नागदा से ही सभ्य मानव जीवन की शुरुआत हुई। इसके बाद ही मानव ने माैसम के साथ जिंदगी जीने का हुनर सीखा था। इसके प्रमाण डाॅ. विष्णु श्रीधर वाकणकर द्वारा पुरातत्व विभाग के साथ 1979 में चंबल तट और नागदाह टेकरी पर उत्खनन के दाैरान ही मिल चुके थे। इसका जिक्र मुरलीधर सिंह की उज्जयिनी का विहंगावलाेकन पुस्तक में है। यानी मालवा में आदिमानव से सभ्य समाज की शुरुआत नागदा से हुई थी।
अश्विनी शाेध संस्थान महिदपुर के निदेशक डाॅ. आर.सी. ठाकुर के मुताबिक 1979 में उत्खनन के समय वह भी डाॅ. वाकणकर के साथ माैजूद थे। चंबल तट किनारे उत्खनन में मौसम के अनुसार बस्ती बनाने के प्रमाण मिले थे। यानी इंसान ने लगभग 40 हजार साल पहले चंबल तट पर ही सभ्य समाज की शुरुआत कर घर बनाना सीखा था। पहले उन्हाेंने नदी किनारे पत्थरों से मकान बनाए, जब बारिश से नदी में बाढ़ से घर डूबे तो ऊंचाई पर घर बनाना शुरू किया। इससे मानव ऋतुकाल अनुसार पत्थराें से घर बनाना सीख गया था। डाॅ. ठाकुर के मुताबिक उस दाैरान ओरे यानी पलाश या सागवान के पत्ते और मिट्टी से घर बनाए जाते थे। इन घरों की संरचना कुछ इस तरह से की जाती थी कि बारिश का पानी घर में नहीं जाता था। यानी मानव के सभ्य या स्थिर जीवन की शुरुआत का पहला प्रयास यहीं से हुआ था।
20 हजार साल तक मरुस्थल
डाॅ. वाकणकर के शाेध में यह बात सामने आई कि मालवा 20 हजार साल तक मरुस्थल यानी रेगिस्तान था। यहां का वातावरण शुष्क और रेगिस्तान में तब्दील हाे गया था। उस दाैरान यहां खजूर, छाेटा थुहर और नागफनी के पाैधे ज्यादा थे। उस युग के अवशेष की वजह से ही अभी भी कई स्थानों पर यह नजर आते हैं।
नागदा में घूमते थे शुतुरमुर्ग
उत्खनन के दाैरान डाॅ. वाकणकर काे चंबल तट किनारे शुतुरमुर्ग के अश्मीभूत अंडे मिले। यानी जब मालवा क्षेत्र शुष्क जलवायु से गुजर रहा था, तब यहां काफी शुतुरमुर्ग आते थे। इस तरह के अंडे नागदा सहित दंगवाड़ा, खरसाैद, राजाेटा, रूनीजा और सुंदराबाद में भी मिले थे।
ताम्रष्युगीन अवशेष मिले
डाॅ. ठाकुर के मुताबिक विक्रम विवि द्वारा 2009 में टकरावदा में खुदाई की थी। यहां ताम्रष्युगीन अवशेष मिले थे। यानी 4 हजार साल पहले मानव यहां स्थाई निवास कर तांबे के बर्तन और औजार बनाना सीख चुका था। इसके बाद ही महाभारतकाल की शुरुआत हुई है, जिसके प्रमाण नागदाह टेकरी पर मिलते है।
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