खतरे में कर्मचारियों की नौकरी
कोरोना वायरस महामारी की वजह से खराब सेल्स रिकॉर्ड और मांग में भारी कमी की वजह से कंपनी को यह फैसला लेना पड़ा है. पिछले वित्त वर्ष के दौरान भारत में कुल 2,500 Harley-Davidson यूनिट ही बिके थे. इसके साथ ही कंपनी का अंतर्राष्ट्रीय बाजार में यह सबसे खराब प्रदर्शन रहा था. कंपनी के इस फैसले के बाद भारत में काम कर रहे करीब 70 कर्मचारियों की छंटनी भी होगी. हार्ली-डेविडसन की असेम्बली यूनिट हरियाण के बावल में है.
लगातार गिर रही थी भारत में बिक्रीभारतीय बाजार में वित्त वर्ष 2019 में हाली बाइक्स की सेल्स 22 फीसदी गिरी थी. कंपनी ने इस साल केवल 2,676 यूनिट्स की ही बिक्री की थी. इसके पहले वित्त वर्ष में 3,413 यूनिट्स की बिक्री की थी. भारत में बिकने वाली 65 फीसदी बाइक्स 750सीसी से कम क्षमता वाली बाइक्स होती हैं.
यह भी पढ़ें: मोदी सरकार ने स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों को बढ़ावा देने के लिए उठाया नया कदम, जानिए क्या हुआ है बदलाव?
इन ऑटोमोबाइल कंपनियों ने छोड़ा भारतीय बाजार
इसके साथ ही हार्ली-डेविडसन उन ऑटोमोटिव ब्रांड्स में शामिल हो गई है, जिन्होंने बीते 3-4 साल में भारतीय बाजार छोड़ने का फैसला लिया है. इस लिस्ट में जनरल मोटर्स, फिएट, Ssangyong, Scania, MAN और UM Motorcycles शामिल है.
रॉयल एनफील्ड को टक्कर देने की तैयारी में थी हार्ली
कुछ साल पहले ही हार्ली ने एक चीनी कंपनी Qianjiang के साथ टाइअप किया था ताकि 350 सीसी इंजन वाली बाइक्स बनाई जाए. इसी साल यह बाइक लॉन्च होने वाली थी, लेकिन बीते कुछ महीनों में इस बारे में कोई भी जानकारी सामने नहीं है. कंपनी ने यह फैसला Royal Enfield को टक्कर देने के लिए लिया था.
यह भी पढ़ें: Maruti Suzuki ने शुरू की खास स्कीम! अब बिना गाड़ी खरीदे बनिए कार के मालिक, इन शहरों में शुरू हुई सर्विस
हार्ली-डेविडसन जिन ब्रांड्स को प्रतिस्पर्धा देती है, उनके ट्रायम्फ, इंडियन, बेनेली, कावासाकी, डुकाटी, एप्रिलिया और प्रीमियम रेंज की यामाहा, कावासाकी, सुजुकी और होंडा की बाइक्स होती हैं. इनमें से अधिकतर ब्रांड्स सोसाइट ऑफ इंडियन ऑ टोमोबाइल मैन्युफैक्चर (SIAM) से कोई डेटा नहीं साझा करते हैं.