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- Villagers Were Angry With The Delay In Construction Of Khanwa River Bridge At Least The Administration Should Make Temporary Route
विदिशा8 मिनट पहले
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खानवा नदी पर पुल निर्माण न होने से ग्रामीणों में रोष है। तीन साल से खानवा नदी पर पुल का निर्माण चल रहा है। अब तक पूरा नहीं हो पाया है। बारिश में तीन महीने से ग्रामीण पैदल और दो पहिया वाहन बिजली के खंबों को नदी पर डालकर निकल रहे है।
ग्रामीणों का कहना है रवि फसल सीजन में ट्रेक्टर बैलगाड़ी नहीं चल पाएंगे। उनको खाद बीज डीजल लाने में समस्या आएगी। खानवा नदी से ग्राम औरंगपुर, बाबली, दाऊद बासौदा, देवीपुर, साईया टपरा के ग्रामीणों आते जाते है। इसके अतिरिक्त दूसरा रास्ता नहीं है। बाबली के सुरेंद्र शर्मा और सत्यम दुबे का कहना है। खानवा नदी के कारण यात्री व कृषि वाहन भी गांव तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
कब तक निकलेंगे पोलों के सहारे: ग्रामीण भी उदयपुर जाने के लिए बारिश के दौरान बिजली पोल के सहारे निकलकर रहे हैं। इससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। गांव के राकेश अहिरवार ने बताया कब तक बिजली के पोलों के सहारे निकलेंगे। कई दिनों से वैकल्पिक मार्ग निर्माण की मांग कर रहे हैं। लेकिन न तो ठेकेदार सुन रहा है न ही प्रशासन इस ओर ध्यान दे रहा है। जबकि 1 साल पहले ऐसे ही जुगाड़ पुल से नदी पार करते समय दो लोग मर चुके हैं। उसके बाद भी प्रशासन इस मामले में गंभीर नहीं है। तेज बारिश में यह मार्ग पूरी तरह बंद रहता है।
15 साल पहले बना थी सड़क
इसी गांव के बालकिशन कुशवाह का कहना है शासन ने यहां पंद्रह साल पहले प्रधानमंत्री मार्ग बनाया हैं। लेकिन ग्रामीणों को मार्ग का लाभ नहीं मिल पा रहा। बारिश के दौरान बीमार और वृद्धों को नदी पार कराने में कठिनाई होती है। ग्राम साईया के मिश्री अहिरवार ने बताया गर्भवती महिलाओं को कंधे पर लादकर नदी पार कराना पड़ती है । नदी में गिरने का डर बना रहता है। नदी से घिरे इन आधा दर्जन गावों में न तो स्वास्थ्य सुविधाएं हैं न ही संजीवनी वाहन आता। इन दिनों मौसमी बीमारियां चल रही है। सर्दी जुकाम बुखार से हर दो घर के लोग परेशान हैं। गांव के उप स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ एएनएम नदी के कारण आती ही नहीं।। इससे ग्रामीणों को खुद उदयपुर मरीज को ले जाना पड़ता। इमरजेंसी पड़ने पर जननी एक्सप्रेस 108 नदी तक आती है। मरीज को चारपाई पर लाते हैं। उसके बाद उसे ले जा पाते हैं।
काफी निर्माण बचा है: ग्रामीणों का कहना है कि काफी निर्माण कार्य बचा हुआ है। ट्री वॉल एक पिलर का निर्माण होना शेष है। पहले लॉकडाउन के कारण काम बंद रहा। इसके बाद बारिश शुरू हो गई। फसल कटाई के कारण लंबर उपलब्ध नहीं है। यदि फसल कटाई के बाद निर्माण शुरू ही हो जाए। तो दिसंबर तक निर्माण पूरा हो जाएगा। संभव नहीं है। दरअसल पुल निर्माण तक ग्रामीणों द्वारा नदी पर बनाया गया पत्थर बोल्डर का रास्ता नहीं हटाते तो इतनी दिक्कत नहीं आती। यदि ठेकेदार ने रास्ता हटाया था। उसके स्थान पर वैकल्पिक रास्ता बनाना था। लेकिन हादसे के बावजूद भी ठेकेदार ने अब तक वैकल्पिक रास्ता नहीं बनाया। इसके कारण सामान्य दिनों में भी 6 गांव के किसानों आवागमन के लिए समस्या आ रही है।इधर ग्रामीणों का कहना है अभी आधा काम बाकी है। जब ठेकेदार आधा निर्माण तीन साल में कर पाया है। तो आने वाले तीन महीने में कैसे पूरा कर देगा।
सबसे ज्यादा गरीब वर्ग हो रहा है परेशान
गरीब तबके के बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते मध्यम वर्ग और धनाढ्य ग्रामीण अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए बाहर भेज देते हैं, लेकिन गरीब परेशान रहते है। नदी पर पुल न होने के कारण ग्रामीण कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। जैसे तैसे चार साल पहले खानवा नदी पुल को सवा चार करोड़ की लागत से मंजूरी मिली। किंतु ठेकेदार की लापरवाही के कारण इसका निर्माण पूरा नहीं हो पा रहा है।
^ठेकेदार ने निर्माण पूरा करने दिसंबर तक का समय मांगा है। यदि समय सीमा में काम नहीं किया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उसे अंतिम अवसर दिया गया है।
पीके गुप्ता महाप्रबंधक प्रधानमंत्री सड़क योजना फेस दो विदिशा।