Deadly 7 days … Less infected but 30 will die, more than 4 deaths daily | जानलेवा 7 दिन… संक्रमित कम मिले लेकिन 30 लाेगाें की जान चली गई, रोजाना 4 से ज्यादा मौतें

Deadly 7 days … Less infected but 30 will die, more than 4 deaths daily | जानलेवा 7 दिन… संक्रमित कम मिले लेकिन 30 लाेगाें की जान चली गई, रोजाना 4 से ज्यादा मौतें


ग्वालियर13 घंटे पहले

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टोपी बाजार में बिना मास्क लगाए खरीदारी करता परिवार

  • लक्षण के बाद भी कई लोग टेस्ट नहीं कराते और इलाज लेने लगते हैं

शहर में पिछले सात दिनों में कोरोना संक्रमण के केस तो कम मिले हैं, लेकिन संक्रमण के चलते मरने वालों की संख्या में वृद्धि हुई है। गुजरे सात दिन में संक्रमण के कुल 1052 मामले सामने आए हैं, लेकिन इस दौरान 30 लोगों की मौत भी हुई। जबकि इससे पहले के सात दिनों में 1611 पॉजिटिव केस मिले थे, लेकिन 27 लोगों की मृत्यु हुई थी। बढ़ती हुई मौतों का अहम कारण मरीजों का जांच अाैर इलाज में लापरवाही बरतना माना जा रहा है। डाॅक्टर्स का मानना है कि लक्षण आने के बाद भी कई लोग काेविड टेस्ट कराने से कतराते हैं और घर में रहकर इलाज लेना शुरू कर देते हैं।

तबीयत ज्यादा खराब होने पर जब टेस्ट कराते हैं व रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तब तक वायरस फेफड़ों को बुरी तरह से जकड़ लेता है। इससे मरीजों को सांस लेने में खासी दिक्कत होती है। बीते सात दिनों में जिन लोगों की मौत हुई, उसमें कई मरीज ऐसे रहे, जिन्हें सुपरस्पेशलिटी हाॅस्पिटल में भर्ती करने के दौरान ही सांस लेने में काफी परेशानी आ रही थी। जिस समय उन्होंने टेस्ट कराया, उस समय उनका आॅक्सीजन लेवल (मानक-95 या उससे ज्यादा) 85 से कम था।

पहले से बीमारी है ताे पाॅजिटिव रिपाेर्ट आने के बाद घर में रहना ठीक नहीं

इस महीने जितने मरीजों की मौतें हुईं, उसमें कुछ ऐसे भी थे, जिन्हें अस्पताल में कुछ घंटे पहले भर्ती कराया गया था। यदि आपको शुगर, बीपी, हृदय व अन्य प्रकार के रोग हैं, तो संक्रमण के लक्षण दिखते ही तुरंत जांच कराएं। यदि आपको पूर्व से कोई बीमारी है तो रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद घर पर रहने की रिस्क ना लें, क्योंकि ऐसे मरीजों की हालत बहुत तेजी से बिगड़ती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण दवाईयों का भी उतना असर नहीं होता। -डाॅ. विजय गर्ग, असिस्टेंट प्रोफेसर, मेडिसिन डिपार्टमेंट

भर्ती हाेने के कुछ घंटाें बाद ही हो गई माैत

पहला मामला

परिवहन मंत्री के स्टाफ में पदस्थ एनपी खर्चे का है। जब एंटीजन टेस्ट किया गया, तब उनका ऑक्सीजन लेवल 85 से कम था। टेस्ट पॉजिटिव आते ही उन्हें सुपरस्पेशलिटी हास्पिटल में भर्ती किया गया, लेकिन भर्ती होने के बाद चंद घंटे बाद ही डाॅक्टरों ने उनके परिजनों को मौत की सूचना दी।

दूसरा मामला

ग्वालियर निवासी मोहन ओझा का है। संक्रमण के लक्षण हाेने के बाद जांच में उनकी रिपाेर्ट पाॅजिटिव आई। गत 25 सितंबर काे उन्हें सुपरस्पेशलिटी हास्पिटल में भर्ती किया गया और अगले ही दिन यानी 26 सितंबर को उनकी मौत हो गई। इस तरह वह भर्ती हाेने के महज 24 घंटे में जान गंवा बैठे।



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