Devotees visited the Hindola Manorath festival on the first day | श्रद्धालुओं ने पहले दिन हिंडोला मनोरथ उत्सव के किए दर्शन

Devotees visited the Hindola Manorath festival on the first day | श्रद्धालुओं ने पहले दिन हिंडोला मनोरथ उत्सव के किए दर्शन


शाजापुर3 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
  • इस बार अधिक मास में 31 की बजाए प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर में 21 ही दिन होंगे विशेष शृंगार

रविवार एकादशी से राधा-कृष्ण मंदिर वजीरपुरा में 21 शृंगार की शुरुआत हुई। इसमें सर्वप्रथम हिंडोला मनोरथ उत्सव शृंगार दर्शन हुआ। यह विशेष शृंगार केवल अधिक मास में ही किया जाता है। जो इस वर्ष महामारी के कारण 31 में से केवल 21 ही शृंगार किए जा रहे हैं। मंदिर में शहरवासियों ने शृंगार के दर्शनों का लाभ शाम 6 से रात 9 बजे तक उठाया और आरती 7 बजे की गई। इसके बाद मंदिर के पट बंद कर दिए गए। यह शृंगार होंगे- राधा कृष्ण मंदिर मोढ़ वणिक समाज वजीरपुरा में एकादशी से भगवान राधा कृष्ण के विभिन्न प्रकार मनोरथ दर्शन कराए जाएंगे। इसमें बाल गोपाल हिंडोला दर्शन, मयूर बांसुरी रंगीन घटा, हरियाली दर्शन, भक्त राज ध्रुव का दर्शन, शरद पूर्णिमा मनोरथ, चुंदड़ी उत्सव, रथ यात्रा, कृष्ण जन्म उत्सव, पूतना उद्धार, बकासुर उद्धार, कालिया दमन, नौका विहार, गोवर्धन लीला, लड्डूगोपाल अभिषेक, श्याम सगाई, तुलसी विवाह, द्वारिकाधीश और जामवंत का मिलन, मनिहारी मनोरथ, प्राचीन मूर्ति हिंडोला दर्शन, दीपावली शृंगार अंतिम दिन 56 भोग लगाकर शृंगार का समापन किया जाएगा। शृंगार का महत्व और वर्णन पंडित गिरिजेश चतुर्वेदी ने बताया की रविवार के दर्शन शृंगार का नाम हिंडोला मनोरथ उत्सव है। इसका वर्णन इस प्रकार है कि द्वापर युग से ही जब भगवान विष्णु बाल रूप में अवतार लेकर आए थे तो बड़े प्रेम से माता यशोदा ने उन्हें पालने में झुलाया। उसी लीला को दिखाते हुए सभी मंदिरों में भगवान लड्डूगोपाल को पालने में झुलाया जाता है और बड़ी सेवा भक्ति की जाती है। एकादशी के दिन पालने का विशेष महत्व रहता है। इस दिन गर्भवती महिला पालने में लड्डूगोपाल काे झुलाती है तो उस महिला के यहां उत्तम संतान जन्म लेती है।

कंस वध, रुक्मिणी मंगल के साथ अधिक मास का महत्व बताया
मारवाड़ सेरी चतुर्भुज मंदिर में भागवत सप्ताह के छठे दिन पतोली के कथावाचक संदीप व्यास ने कंस वध, रुक्मिणी विवाह के प्रसंग रविवार को सुनाएं। व्यास ने कहा अगर चार धाम की यात्रा नहीं की तो अधिक मास में भागवत कथा का श्रवण करें। इससे वह लाभ मिल जाता है जो चार धाम की यात्रा से मिलता है। कथा मंदिर में दोपहर 2 से 5 बजे तक हो रही है। इसमें सोशल डिस्टेंस का पालन किया जा रहा है।

मुकुट नहीं पगड़ी पहनते हैं ठाकुरजी -पं. चतुर्वेदी
मंदिर के पुजारी चतुर्वेदी बताते हैं कि पूरे शहर में जहां भगवान कृष्ण की मूर्ति के लिए मुकुट का उपयोग होता है। वहीं राधा कृष्ण मंदिर में केवल पगड़ी ही अधिक मास में पहनाई जाती है। इसे वह स्वयं पहनाते हैं। पगड़ी में मोर पंख लगाया जाता है, जो पिछले 30 वर्षों से एक ही है और अब तक पगड़ी में शोभा बढ़ा रहा है। यही नहीं 21 दिन के शृंगार का पूरा सामान जिसमें मोतियों की माला, चंदन तथा कुमकुम, वस्त्र आदि भी मथुरा से मंगवाया जाता है।



Source link