The story of self-sufficiency 67 km away from Ujjain, windmills preparing more power | उज्जैन से 67 किमी दूर आत्मनिर्भरता की कहानी, जरूरत से ज्यादा बिजली तैयार कर रहीं पवन चक्कियां

The story of self-sufficiency 67 km away from Ujjain, windmills preparing more power | उज्जैन से 67 किमी दूर आत्मनिर्भरता की कहानी, जरूरत से ज्यादा बिजली तैयार कर रहीं पवन चक्कियां


उज्जैन11 घंटे पहले

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उज्जैन शहर से 67 किमी दूर आगर जिले में सौर ऊर्जा के बाद बिजली बनाए जाने का दूसरा प्रमुख संयंत्र पवन चक्की ही है। आगर जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर बर्डा बरखेड़ा, महुड़िया, सालरी पवन चक्कियों का हब है। उज्जैन-कोटा राजमार्ग से निकलने वाले लोगों को पहाड़ियों पर लगी ये पवन चक्कियां आकर्षित करती है, खासकर बच्चों को। इसके अलावा बड़ौद, गाता नेवरी, लाडवन, करवाखेड़ी आदि क्षेत्र में तीन अलग-अलग कंपनियों ने पवन चक्कियां लगा रखी है।

इसलिए उद्योग की अपार संभावनाएं

आगर जिले में 122 पवन चक्कियां हैं। इनसे हर माह 10 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन होता है। जबकि जिले में 4 करोड़ 85 लाख यूनिट बिजली ही खर्च होती है। आगर जिले को पवन चक्कियों के अलावा सोलर प्लांट से भी बिजली मिलती है। पाॅवर जनरेशन का हब माने जाने वाले इस जिले में इसी कारण उद्योग की अपार संभावना है।

सुजलान आईनक्स कंपनी की पवन चक्कियां जिले में लगी हुई है। इनकी लागत 10 करोड़ रुपए से अधिक है, जबकि विंडवर्ल्ड कंपनी की पवन चक्की की लागत 6 करोड़ बताई जाती है। बिजली कंपनी को इन कंपनियों द्वारा अनुबंध करके बिजली बेची जाती है। सामान्यतः 4 रुपए यूनिट के मान से अधिकांश कंपनियां बिजली बेचती है।

अन्य जगह भी करते हैं सप्लाय

बिजली कंपनी के अधीक्षण यंत्री जे.आर. कनखरे ने बताया कि जिले में आगर, बड़ौद, सुसनेर में ग्रिड को बिजली सप्लाई करती है। इसके अलावा इनके द्वारा अन्य स्थानों पर भी बिजली दी जाती है।

  • 122 पवन चक्कियां जिले में
  • 10 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन (हर माह)
  • 4.85 करोड़ यूनिट बिजली खर्च (हर माह)
  • 5.15 करोड़ यूनिट बिजली की बचत
  • 04 रुपए प्रति यूनिट दे रहे बिजली



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