The data of new patients did not go beyond 251, now less than half of the positives are available in 15 days | 251 से आगे नहीं गया नए मरीजों का आँकड़ा, अब 15 दिन में ही आधे से कम मिल रहेे पॉजिटिव

The data of new patients did not go beyond 251, now less than half of the positives are available in 15 days | 251 से आगे नहीं गया नए मरीजों का आँकड़ा, अब 15 दिन में ही आधे से कम मिल रहेे पॉजिटिव


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जबलपुर13 घंटे पहले

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  • 12 दिनों से डिस्चार्ज होने वाले मरीजों की संख्या ज्यादा
  • 21 फीसदी तक पहुँची थी संक्रमण दर अब 9 के करीब

सितंबर माह में कोरोना के कोहराम से पूरा जिला परेशान हो गया था, लगातार 200 से अधिक मरीज रोज मिल रहे थे। इस दौरान शासकीय सहित निजी चिकित्सा संस्थानों में बेडों का संकट पनप गया था। लोगों में डर बढ़ रहा था, लेकिन महीने के आखिरी सप्ताह तक आते-आते संक्रमण कमजोर पड़ने लगा। नतीजा यह है कि 20 सितंबर को एक दिन के सर्वाधिक 251 नए पॉजिटिव मिले थे, जो कि अब इन 15 दिनों में घटकर 114 तक पहुँच गए हैं। यह आँकड़ा तक है जब 1200 से अधिक सैंपलों की जाँच की गई हो। चिकित्सक अब कोरोना का पीक गुजरने के साथ ही लोगों में मास्क व बचाव के तरीकों का पालन करने के प्रति सतर्क रहने को इस कमी का कारण मान रहे हैं।

21 फीसदी तक पहुँची थी संक्रमण दर

जिले के साथ ही प्रदेश में भी कोरोना मरीजों के मिलने की शुरूआत यहाँ से 20 मार्च को शुरू हुई थी। शुरूआती दिनों में लॉकडाउन के चलते मई माह तक कोविड टेस्ट के लिए संसाधन जुटाए जाते रहे, वहीं दूसरे जिलों में भी संक्रमण फैलने लगा था। हालात यह हुए कि आईसीएमआर की वायरोलाॅजी लैब की टेस्टिंग क्षमता बढ़ाने के साथ ही मेडिकल काॅलेज में लैब तैयार की गई, लेकिन इनमें दूसरे जिलों के सैंपलों का दबाव आने के बाद यहाँ के सैंपलों की रिपोर्ट आने में 5 से 7 दिन का समय लगता था। शासन ने अहमदाबाद की सुप्राटेक लैब से अनुबंध कर सैंपलों को वहाँ भेजने की शुरूआत की तो टेस्टिंग में तेजी आई। जून में पहला अनलाॅक शुरू होने के बाद ही टेस्टिंग बढ़ी और अगस्त और सितंबर महीना कोरोना संक्रमण के लिए सबसे भारी रहा।

स्वास्थ्य सेवाएँ कमजोर पड़ीं

शुरूआती दौर में एसिम्टोमेटिक मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण प्रशासन का ज्यादा फोकस कोविड केयर सेंटर बनाने में रहा, लेकिन जुलाई के बाद गंभीर मरीजों की संख्या में तेज बढ़ोत्तरी होने के बाद सरकारी स्वास्थ्य सेवाएँ लगभग दम तोड़ती दिखीं। हालात को देखते हुए निजी अस्पतालों पर दबाव बनाकर 10 प्रतिशत बेड कोविड मरीजों के लिए तय करने की शुरूआत हुई। अगस्त मध्य से सितंबर अंत तक निजी अस्पतालों में बेड की मारामारी रही। हालाँकि अब तस्वीर बदल गई है, नए मरीजों की संख्या घटने से एक्टिव केस भी कम हुए तो मेडिकल, विक्टोरिया सहित निजी अस्पतालों में भी बेड की उपलब्धता आसान हुई।



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