हाइड्रोजन ईंधन सेल से वाहन चलाने की दिशा में मिली सफलता. (फोटो सौजन्य से सोशल मीडिया)
माना जा रहा है कि यह तकनीक बस (Bus) और ट्रक जैसे बड़े वाहनों (Big vehicles like trucks) के लिए अत्यधिक कारगर साबित होगी, क्योंकि बड़े वाहनों को चलाने के लिए ज्यादा ऊर्जा (More energy) की जरूरत होती है.
- News18Hindi
- Last Updated:
October 11, 2020, 2:18 PM IST
हानिकारक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी
शनिवार को एक बयान में इस बारे में जानकारी दी गई. HFC तकनीक विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच (हवा से) रासायनिक प्रतिक्रियाओं का उपयोग करती है और जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) के उपयोग को समाप्त करती है. ईंधन सेल तकनीक केवल पानी छोड़ती है और इस प्रकार अन्य वायु प्रदूषकों के साथ हानिकारक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी करती है. ईंधन सेल स्टैक से मतलब विद्युत ऊर्जा पैदा करने वाली बैटरियों से है, जिन्हें एकत्र करने के लिए ज्यादा जगह की जरूरत नहीं पड़ती. इसे सात सीटों वाली कार में आसानी से फिट किया जा सकता है. यह तकनीक 65-75 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भी काम करती है जो वाहन चलाने के वक्त पैदा होने वाली गर्मी को सह सकती है.
यह भी पढ़ें: Classic 350 और H’ness CB350 में कौन सी बाइक है बेहतर?, जानिए इनकी कीमत और specificationsइलेक्ट्रिक कार में ही ईंधन सेल फिट कर हुआ ट्रायल
बयान में कहा गया है कि CSIR और KPIT ने 10 किलोवाट की इलेक्ट्रिक बैटरी (Electric Battery) तैयार की है. HFC तकनीक का इस्तेमाल जैसे-जैसे बढ़ेगा, प्रदूषण का स्तर कम होगा और दुनिया एक साफ-सुथरी जगह बन जाएगी. परीक्षण के लिए बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक कार में ही ईंधन सेल को फिट किया गया था.
CSIR-KPIT demonstrates India’s first hydrogen fuel cell fitted car
The heart of the PEM fuel cell technology includes the membrane electrode assembly, which is wholly a CSIR knowhowRead more: https://t.co/CYJpARX1s7 pic.twitter.com/kuI2GQbR1C— PIB India (@PIB_India) October 10, 2020
छोटी बैटरी से बड़े पैमाने पर विद्युत ऊर्जा
माना जा रहा है कि यह तकनीक बस और ट्रक जैसे बड़े वाहनों के लिए अत्यधिक कारगर साबित होगी, क्योंकि बड़े वाहनों को चलाने के लिए ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है. एचएफसी तकनीक में छोटी बैटरी से ही बड़े पैमाने पर विद्युत ऊर्जा का उत्पादन होता है.
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केपीआइटी के चेयरमैन रवि पंडित ने कहा कि, इस प्रौद्योगिकी का बेहतर भविष्य है और इसके स्वदेशी विकास के कारण, पहले से कहीं अधिक व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य होने की उम्मीद है. सीएसआइआर-नेशनल केमिकल लैबोरेटरी के निदेशक अश्विनी कुमार नांगिया ने कहा कि, अब समय आ गया है कि देश में परिवहन व्यवस्था में ईंधन के रूप में हाइड्रोजन आधारित अक्षय ऊर्जा का प्रयोग किया जाए.