खरगोनएक दिन पहले
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आईसीयू में बिजली का काम अधूरा होने से मरीजों की जान पर बन आई।
- 92 लाख रुपए की लागत का आईसीयू अधूरा, वेंटीलेटर न होने से बनी स्थिति
कोरोना संक्रमण को 6 माह से ज्यादा समय हो गया। लेकिन जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था स्वास्थ्य महकमा अभी तक पूरी नहीं कर पाया। कोरोना के गंभीर व संदिग्ध मरीजों की जान बचा पाना मुश्किल हो रहा है। करीब 92 लाख रुपए की लागत के आईसीयू का काम अधूरा है। भोपाल की एजेंसी काम नहीं कर रही है। इसके चलते सब इंजीनियर ने भोपाल अफसरों को पत्र लिखा है। इसमें एजेंसी को हटाने से लेकर कार्रवाई तक की मांग की है। स्वास्थ्य प्रशासन से जुड़े अफसरों का भी मानना है कम संसाधन व अधूरे काम के बीच जिला अस्पताल में वेंटीलेटर नहीं होने से करीब 25 से ज्यादा संक्रमित व संदिग्ध लोगों की जान गई तो कई को रैफर करना पड़ा। जिला अस्पताल में कोरोना मरीज के लिए 12 बेड का आईसीयू का काम तीन माह से चल रहा है। भोपाल की एजेंसी काम देरी से कर रही है। डेढ़ माह पहले कलेक्टर अनुग्रहा पी ने दौरा किया। जल्द शुरू करने की हिदायत दी, लेकिन आईसीयू का काम शुरू नहीं हो पाया। 20 दिन पहले काम शुरू हुआ, लेकिन पूरा नहीं किया जा सका। टेस्टिंग हुई। इसमें भी इलेक्ट्रिक कनेक्टिविटी में गलत हो गई। इसके अलावा रूम भी वातानुकूलित नहीं हो पा रहा है। इंजीनियर नहीं आ रहे हैं। इसकी जांच के बाद ही आईसीयू शुरू होगा। सब इंजीनियर सुरुचि परते ने कहा अभी काम अधूरा है। भोपाल एजेंसी के बारे में अफसरों को पत्र लिख चुके हैं। एजेंसी को हटाने से लेकर कार्रवाई तक का जिक्र है।
जिला अस्पताल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आईसीयू का काम ठप, क्योंकि प्रदेशभर में एजेंसी कर रही काम, कम हैं इंजीनियर
आईसीयू: 2 माह से एसी बंद, रैफर हो रहे गंभीर
जिला अस्पताल के आईसीयू में दो माह से एसी बंद हैं। यहां गंभीर मरीजों को पंखे से हवा कर रहे हैं तो कोई घर से टेबल फेन ला रहे हैं। यहां अस्पताल प्रबंधन कूलर की व्यवस्था भी नहीं करा पा रहा है। कूलर है तो वह कर्मचारी उपयोग कर रहे हैं। गंभीर मरीजों को इंदौर रैफर करना पड़ रहा या वह निजी में जा रहे हैं। क्योंकि यहां गर्मी के कारण उनकी हालत सुधरने की जगह बिगड़ रही है। ऊन बुजुर्ग की आरती वर्मा (18) को शुगर के कारण भर्ती किया। यहां उसकी तबीयत बिगड़ी तो डॉक्टरों ने आईसीयू में भर्ती कर दिया। एसी बंद होने से उसे पसीना होने लगा। मजबूरी में परिजन घर से टेबल फेन लेकर आए। तबीयत बिगड़ी तो आरती को निजी अस्पताल ले गए। पिछले माह ही एक राजनैतिक पार्टी के रिश्तेदार को गंभीर अवस्था में लाया गया। एसी बंद होने के कारण उन्होंने भी सोशल मीडिया पर मांग कर डाली, लेकिन अपने बड़े नेताओं से ऐसी की रिपेयरिंग नहीं करा पाए।
यहे है बड़ी वजह…
निमाड़ के 3 जिलों में काम चालू
प्रदेशभर के जिलों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आईसीयू तैयार किए जा रहे हैं। खरगोन, खंडवा व बड़वानी में आईसीयू के लिए 2 करोड़ 77 लाख रु. की स्वीकृति हुई है। इसमें एक आईसीयू करीब 92 लाख रुपए की लागत से तैयार हो रहा है। एजेंसी में ज्यादा इंजीनियर व कर्मचारी नहीं होने से कई जगह काम अधूरा है। इसमें खरगोन जिला भी शामिल है।
यहां मैकेनिक भी आने से डर रहे
यहां एसी रिपेयरिंग के लिए मैकेनिक आने में डर रहे हैं। क्योंकि मैकेनिक का मानना है अस्पताल में संक्रमितों का इलाज चल रहा है। रिपेयरिंग के दौरान संक्रमित होने का खतरा है।
^ गंभीर मरीजों के इलाज में संसाधनों की कमी है। उपलब्ध व्यवस्थाओं में बेहतर इलाज की कोशिश हैं। आईसीयू को लेकर भोपाल अफसरों को पत्र लिखा है। उम्मीद तो है। जल्दी सुविधा मिलेगी तो आसानी होगी। -डॉ. आर जोशी, सिविल सर्जन
12 नए कोरोना मरीज मिले
पिछले 24 घंटे में कोरोना के 12 नए मरीज मिले हैं। वहीं 33 मरीज डिस्चार्ज हुए हैं। जिले में अब कुल संक्रमित 3566 हो गए। इनमें से 3291 मरीज डिस्चार्ज और 52 मरीाजों की मृत्यु हो चुकी है। 223 की हालत स्थिर है।