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- At The Meeting Of The Peace Committee, The Officials Gave Information About The Bath On Kartik Purnima (30 November) In Surajkund.
हाेशंगाबाद21 मिनट पहले
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संगम पर मेला
- शांति समिति की बैठक में अफसरों ने दी जानकारी कार्तिक पूर्णिमा (30 नवंबर) पर सूरजकुंड में भी नहीं होगा स्नान
- हजारों श्रद्धालु करते हैं स्नान, मां नर्मदा काे दाल-बाटी का लगाते हैं भाेग
कार्तिक पूर्णिमा पर नर्मदा-तवा नदी के संगम स्थल बांद्राभान में डुबकी लगाने की 200 साल पुरानी परंपरा इस साल काेराेना के कारण टूटेगी। इस बार 30 नवंबर काे बांद्राभान में लगने वाला मेला नहीं लगेगा। साेमवार काे कलेक्टाेरेट में हुई जिला स्तरीय शांति समिति की बैठक में बांद्राभान मेला नहीं करने का फैसला लिया गया। इसके अलावा सूरजकुंड मेले और पर्वों पर सार्वजनिक स्नान पर प्रतिबंध लगाया गया है। बैठक में विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा, एडीएम जीपी माली, जिपं सीईओ मनोज सरियाम, एएसपी अवधेश प्रताप सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।
हजारों श्रद्धालु करते हैं स्नान, मां नर्मदा काे दाल-बाटी का लगाते हैं भाेग
होशंगाबाद से 8 किमी दूर बांद्राभान में हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर मेला लगता है। इस दिन संगम पर स्नान करने का महत्व है। मेले में करीब 500 अस्थाई दुकानें लगती, झूले लगते हैं। लाेग परिवार के साथ मेले में आते हैं और दाल-बाटी चूरमा बनाकर मां नर्मदा काे भाेग लगाते हैं। हालांकि इस साल मेला नहीं लगेगा।
चार दिनों तक चलता है संगम पर मेला, शादियां भी होती है तय
बांद्राभान में कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाला मेला 4 दिनों तक चलता है। लोग दूर दूर से आकर यहां रुकते हैं। आरटीओ मेले के लिए विशेष बसें चलाता है तो पीएचई विभाग पीने की पानी व्यवस्था करता है। चार दिनों के लिए विशेष चौकी भी बनाई जाती है। मेले में शादियां भी तय करने की परंपरा है।
बांद्राभान मेले का ये है महत्व
बांद्राभान में लगने वाले मेले का विशेष महत्व है। यहां पर नर्मदा और तवा नदी का संगम होता है। मान्यता है पूर्व में एक राजा को वानर की आकृति से यहां मोक्ष मिला था। तभी से मेला लगता है। पूर्णिमा के दिन संगम स्थल पर डुबकी लगाने से लोगों की मनोकामना पूरी होती हैं। किवदंती है कि संगम पर कई तपस्वियों ने मोक्ष के लिए तपस्या की थी। इसी कारण पूरे प्रदेश से लोग यहां आते हैं। तीन से चार दिन तक यहां रुकते हैं।
इधर, दुर्गा प्रतिमा विर्सजन के लिए 10 लाेगाें की ही अनुमति
बैठक में नवरात्र और दुर्गा प्रतिमा स्थापना सहित प्रतिमा विसर्जन, दशहरा रावण दहन, ईद काे लेकर भी चर्चा हुई। अधिकारियाें ने शासन की गाइडलाइन काे विस्तार से बताया। एडीएम जीपी माली के मुताबिक शासन के निर्देशानुसार देवी प्रतिमाओं की स्थापना की जाएगी। लाउड स्पीकर न्यायालय की गाइडलाइन के अनुसार बजेंगे। पंडाल अधिकतम 45 फीट तय किया है। भीड़ एकत्र न हाे इसकी जिम्मेदारी समिति की रहेगी। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी हाेगा। मूर्ति विसर्जन स्थल पर अधिकतम 10 लाेग जा सकेंगे।
प्रतीकात्मक हाेंगे चल समाराेह : परंपरागत श्रीराम के चल समारोह की अनुमति प्रतीकात्मक रूप से होगी। रामलीला तथा रावण दहन कार्यक्रम खुले मैदान में फेस मास्क तथा सोशल डिस्टेंसिंग की शर्त पर हाेगा। आयोजन समिति संबंधित एसडीएम की पूर्व अनुमति से आयोजित किए जा सकेंगे।