उज्जैन9 घंटे पहले
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राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना द्वारा भारत रत्न एपीजे अब्दुल कलाम : शक्ति संपन्न और आत्मनिर्भर भारत पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का आयोजन किया। मुख्य अतिथि साहित्यकार शरदचंद्र शुक्ल, शरद आलोक, ओस्लो, नॉर्वे थे। मुख्य वक्ता विक्रम विवि उज्जैन के कुलानुशासक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा थे। अध्यक्षता डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख पुणे ने की। संगोष्ठी में साहित्यकार डॉ.अर्चना झा, डॉ. मंजू रूस्तगी और संस्था के महासचिव डॉ. प्रभु चौधरी ने विचार व्यक्त किए। साहित्यकार शरदचंद्र शुक्ल शरद आलोक ने कहा भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आदर्श जीवन जीने वाले महान व्यक्तित्व के धनी थे।
उन्होंने शिक्षकीय कर्म को सर्वोपरि महत्व दिया है। प्रो. शैलेंद्रकुमार शर्मा ने कहा आत्मनिर्भर और शक्ति संपन्न राष्ट्र के निर्माण के लिए डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने व्यापक संकल्पना दी थी। उनकी दृष्टि में यदि हम विकास चाहते हैं तो देश में शांति की स्थिति होना आवश्यक है। डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख ने कहा डॉ. कलाम की दृष्टि में यदि हमें आत्मविश्वास के साथ जीना है तो आत्मनिर्भर बनना होगा। अध्यक्ष ब्रजकिशोर शर्मा ने संगोष्ठी की प्रस्तावना प्रस्तुत कर डॉ. कलाम का परिचय दिया। संचालन संस्था की राष्ट्रीय महिला इकाई की महासचिव डॉ. रश्मि चौबे ने किया। आभार अनिल ओझा ने माना।