Benefit of schemes stuck in loan books, farmers wandering for 6 months, could not register themselves for paddy purchase | ऋण पुस्तिकाओं के फेर में अटका योजनाओं का लाभ, 6 माह से भटक रहे किसान, धान खरीदी के लिए नहीं करा पाए अपना पंजीयन

Benefit of schemes stuck in loan books, farmers wandering for 6 months, could not register themselves for paddy purchase | ऋण पुस्तिकाओं के फेर में अटका योजनाओं का लाभ, 6 माह से भटक रहे किसान, धान खरीदी के लिए नहीं करा पाए अपना पंजीयन


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गोसलपुर11 घंटे पहले

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सिहोरा, मझौली, पाटन तहसील कार्यालय से किसानों को नहीं ऋण पुस्तिकाएं नहीं मिल पा रही हैं। इससे किसानों को शासन द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। हाल ही में ऋण पुस्तिका नहीं होने से किसान धान खरीदी के लिए अपना पंजीयन नहीं करा पाए।

वहीं अब किसान खाद-बीज के लिए भी भटक रहे हैं। इस संबंध में अधिकारियों की दलील है कि कोरोना संक्रमण के चलते भोपाल से ऋण पुस्तिकाएं नहीं आई हैं, जिसके चलते जिले भर में ऋण पुस्तिकाओं का टोटा बना हुआ है।

ऋण पुस्तिका के लिए किसान तहसील कार्यालय सहित हल्का पटवारियों के चक्कर काट रहे हैं। गौरतलब है कि किसानों को नामांतरण, बटवारा, फौती प्रक्रिया पूरी होने के बाद नई ऋण पुस्तिकाएं बनाकर दी जाती हैं। लेकिन पिछले छह महीनों से किसान ऋण पुस्तिकाओं के लिए भटक रहे हैं। ऋण पुस्तिका ना बनने के कारण किसानों को खाद-बीज व नए केसीसी बनवाने के लिए भटकना पड़ रहा है।

मांगी 5 हजार, मिलीं सिर्फ ढाई सौ ऋण पुस्तिकाएं

सिहोरा तहसील कार्यालय से पांच हजार ऋण पुस्तिकाओं की डिमांड जिला स्तर पर भेजी गई थी, जिसमें से केवल ढाई सौ ऋण पुस्तिकाएं सिहोरा तहसील कार्यालय को मिलीं। लोकसेवा केंद्र से पारित आदेश से संबंधित किसानों को ये ऋण पुस्तिकाएं दी गईं। कृषक सुखचैन चौरसिया, राकेश चौरसिया, गोकुल यादव, मथुरा यादव ने जिला प्रशासन से ऋण पुस्तिकाएं उपलब्ध कराने की माँग की है।

अटक रहे ये काम

किसानों ने बताया की ऋण पुस्तिका नहीं होने के कारण बैंकों से नए केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) नहीं बन पा रहे हैं। इसके अलावा ऋण पुस्तिका नहीं होने से बहुत से किसान समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए अपना पंजीयन भी नहीं करा पाए। ऋण पुस्तिका नहीं होने से रजिस्ट्री संबंधी कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। इस संबंध में किसान सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

इनका कहना है

पिछले कई महीनों से नई ऋण पुस्तिकाएं भोपाल से प्राप्त नहीं हो रही हैं, जिसके चलते यह समस्या बनी हुई है। शासन स्तर पर लगातार पत्राचार किया जा रहा है। लोकसेवा केंद्र से पारित आदेशों पर ऋण पुस्तिका प्रदान करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

-ललित ग्वालवंशी, अधीक्षक भू-अभिलेख



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