Immersion of Durga idols started without moving ceremony in Bhopal; Being immersed by crane, people are not allowed to land in water, watch video | भोपाल में पहली बार बिना चल समारोह के दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू; क्रेन से विसर्जित किया जा रहा, लोगों को पानी में उतरने की अनुमति नहीं

Immersion of Durga idols started without moving ceremony in Bhopal; Being immersed by crane, people are not allowed to land in water, watch video | भोपाल में पहली बार बिना चल समारोह के दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू; क्रेन से विसर्जित किया जा रहा, लोगों को पानी में उतरने की अनुमति नहीं


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भोपाल9 मिनट पहले

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इस बार भोपाल में सिर्फ क्रेन से ही विजर्सन किया जा रहा है। बैरागढ़ विसर्जन घाट पर प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता हुए।

  • शहर में 5 हजार से अधिक पुलिस, होमगार्ड, एनडीआरएफ और निगम समेत अन्य कर्मचारी तैनात
  • पंडालों से सीधे विसर्जन घाट ले जाया जा रहा, पिछले साल दो हजार थीं, इस बार यह संख्या 1500

मां दुर्गा की नौ दिन की अराधना के बाद रविवार को पूर्णाहुति के साथ भोपाल में दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू हो गया। राजधानी में पहली बार चल समारोह नहीं निकाला जा रहा। इस बार कोरोना के कारण शासन से इसकी अनुमति नहीं दी है। इस कारण प्रतिमाएं पंडालों से सीधे विसर्जन घाट तक ले जाई जा रहीं हैं। विसर्जन घाट के पानी में इस बार सभी के उतरने पर रोक है।

ऐसे में ऑटोमेटिक क्रेन की मदद से ही मां की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा रहा है। जिले के 7 घाटों पर विसर्जन की व्यवस्था की गई है। घाटों पर बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं, ताकि भीड़ घाटों तक न पहुंचे। पिछले साल बड़ी छोटी करीब 2 हजार झांकियां बैठाई गई थीं, जबकि इस बार यह संख्या करीब डेढ़ हजार ही है।

शाहपुरा विसर्जन घाट पर ऑटोमेटिक क्रेन से मूर्तियों का विसर्जन किया जा रहा है।

शाहपुरा विसर्जन घाट पर ऑटोमेटिक क्रेन से मूर्तियों का विसर्जन किया जा रहा है।

7 घाटों पर 13 क्रेन लगाई गईं

दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए प्रेमपुरा घाट, रानी कमलापति घाट, बैरागढ़, हथाईखेड़ा, खटलापुरा, ईटखेड़ी और कोजलुआकलां घाट बनाए गए हैं। सभी सात घाटों पर कुल 13 क्रेन लगाई गई हैं। पूरी व्यवस्था के लिए 5 हजार से अधिक पुलिस, होमगार्ड, एनडीआरएफ और निगम समेत अन्य कर्मचारी तैनात किए गए हैं। एक प्रतिमा के साथ में 10 से अधिक लोग शामिल नहीं हो सकते हैं।

बैरागढ़ विसर्जन घाट पर इस तरह व्यवस्था की गई है।

बैरागढ़ विसर्जन घाट पर इस तरह व्यवस्था की गई है।

किसी तरह का कोई आयोजन नहीं

अभी तक भोपाल में नवरात्रि के अंतिम दिन दोपहर बाद विसर्जन शुरू होता था। चल समारोह में शामिल होने के बाद दूसरे दिन दोपहर तक विसर्जन होता रहता था, लेकिन इस बार चल समारोह की अनुमति ही नहीं है। ऐसे में पुराने शहर में नादरा बस स्टैंड से निकलने वाला चल समारोह नहीं निकाला गया। प्रतिमाओं के ले जाने के दौरान डीजे, बैंड-बाजे और चलित झांकियां लोगों को नजर नहीं आईं।

शहर के 7 विसर्जन घाटों पर पुलिस बल और कर्मचारियों समेत 5 हजार लोगों को लगाया गया है।

शहर के 7 विसर्जन घाटों पर पुलिस बल और कर्मचारियों समेत 5 हजार लोगों को लगाया गया है।

सभी पूजा पाठ हुई गरबा आदि नहीं हुए
नवरात्रि के अंतिम दिन शहर में जगह-जगह स्थापित मां दुर्गा की पूजा और हवन पूर्णाहुति की गई। कन्याभोज और भंडारे आदि हुए, लेकिन इनकी संख्या भी काफी कम रही। इस बार गीत, गरबा और डांडिया नृत्यों की धूम नहीं रही। गत वर्ष 2000 प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया था। इनके विसर्जन के लिए नगर निगम ने तालाबों के कुल 21 घाटों पर इंतजाम किए थे।

सिर्फ छोटे तालाब में क्रेन लगाई थी

पिछले साल राजधानी में इन मूर्तियों में से 738 मूर्तियां प्रेमपुरा घाट पर, हथाईखेड़ा बांध पर 303, कमलापति घाट पर 200 और इतनी ही बैरागढ़ पर विसर्जित की गई थीं। शेष मूर्तियों का विसर्जन छोटे तालाब में किया गया। छोटे तालाब में भोपाल के इतिहास में पहली बार क्रेन से मूर्तियों का विसर्जन किया गया था।

बैरसिया रोड स्थित हिनोतिया जागीर पहाड़ी वाली माता बाघराज मंदिर में दर्शनार्थ आने वाली समस्त मातृ शक्ति का सम्मान किया गया। कन्या भोज और भंडारे भी किया गया।

बैरसिया रोड स्थित हिनोतिया जागीर पहाड़ी वाली माता बाघराज मंदिर में दर्शनार्थ आने वाली समस्त मातृ शक्ति का सम्मान किया गया। कन्या भोज और भंडारे भी किया गया।

कन्याओं को शिक्षण सामग्री और मास्क आदि बांटे

श्री दुर्गा उत्सव समिति गणपति चौक मंगलवारा द्वारा मां भगवती स्वरूपा कन्याओं का चरण पादुका पूजन किया गया। समिति के उपाध्यक्ष विवेक साहू ने बताया कि हर वर्ष विशाल भंडारा किया जाता था, लेकिन इस वर्ष कोविड-19 को देखते हुए इसका स्वरूप बदल दिया। कन्याओं को शैक्षणिक सामग्री, मास्क, सैनिटाइजर, बेग, लंच बॉक्स सहित अन्य सामग्री देकर चरण पादुका पूजन किया गया।



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