मलेरिया के 45% मामले हुए कम10 माह में 0.06% मरीज ही मिले

मलेरिया के 45% मामले हुए कम10 माह में 0.06% मरीज ही मिले


रतलाम22 मिनट पहले

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  • 1.30 लाख लोगों की हो चुकी जांच, ऐसी सावधानी जारी रहे…

बीमारियों के इस काल में अच्छी खबर है। इस साल मच्छरों की वजह से ज्यादा शहरवासियों को बीमार नहीं होना पड़ा है। 10 महीने में 1.30 लाख लोगों में मलेरिया की शंका थी, जांच हुई तो सिर्फ 0.06% लोग ही पॉजिटिव निकले। इधर, राहत ये हैं कि पिछले साल के मुकाबले 45% कम केस सामने आए है। हालांकि, मच्छरों का सीजन अभी जारी है, ऐसे में आप सावधानी रखना ना छाेड़ें। मच्छरों का सबसे ज्यादा खतरा मानसून काल में होता है। जनवरी से अक्टूबर तक 84 लोगों में ही मलेरिया की पुष्टि हुई है। ये आंकड़े पिछले साल से राहतभरे इसलिए हैं क्योंकि 2019 में इसी दौरान 166 लोग मलेरिया का शिकार हो गए थे। आरडीटी से 1.56 लोगों की जांच की थी। वहीं, 2019 में सालभर में 154 मलेरिया के केस सामने आए थे।

जानिए, वो प्रमुख कारण जिनसे जिले में मलेरिया और डेंगू के मामले कम हो गए

मलेरिया प्रभावित ग्रामों में प्रचार प्रसार किया जा रहा है। मच्छरदानियों के उपयोग को बढ़ावा दे रहे हैं। मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में फीवर सर्वे हो रहा है। मलेरिया रोगियों की खोज कर उन्हें तत्काल ट्रीटमेंट दे रहे हैं। कीटनाशक दवा का छिड़कावा हो रहा है। कंटेनर सर्वे हो रहा है, लार्वा को नष्ट कर रहे हैं, इसके लिए टीमें बनी है।

डेंगू : अब तक 7 मामले, 210 घरों में मिला लार्वा
जिले में इस साल डेंगू के 7 केस सामने आए है। ये कम ही है क्योंकि, 2019 में सालभर में 162 पॉजिटिव सामने आए थे। 2018 में जिले में सालभर में 242 पॉजिटिव मिले थे। अब तक 210 घरों में डेंगू का लार्वा मिला है। ​​​​​​​

जीवनचक्र : डेंगू मच्छर साफ पानी में अंडे देता है
डेंगू का मच्छर साफ पानी में 250 अंडे देता है। पूरे जीवनकाल में तीन बार अंडे देता है। अंडों से दो से तीन दिन में लार्वा निकलता है। 12 से 48 घंटे में प्यूपा बन जाता है। इसके 12 से 24 घंटे में मच्छर बनकर उड़ जाता है।



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