इलाज में देरी करने से बिगड़ सकती है हालत; जुकाम के साथ तेज बुखार होने पर कोरोना की आशंका, देरी जानलेवा

इलाज में देरी करने से बिगड़ सकती है हालत; जुकाम के साथ तेज बुखार होने पर कोरोना की आशंका, देरी जानलेवा


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ग्वालियर14 घंटे पहले

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प्रतीकात्मक फोटो

मौसम में बदलाव हाेने के चलते कोरोना संक्रमित कुछ ही दिन में गंभीर हालत में पहुंच रहे हैं। अस्पताल आने वाले मरीजों में कई ऐसे हैं जिन्हें जुकाम के साथ तेज बुखार आया और वे उसे वायरल फीवर समझकर घर पर दवाएं लेते रहें। उन्हें उम्मीद रही कि तीन दिन बाद वे स्वत: ही ठीक हो जाएंगे, लेकिन उनकी हालत बिगड़ी और जांच में उन्हें कोरोना संक्रमण पाया गया। इलाज नहीं मिलने के कारण यह संक्रमण उनके फेफड़े में फैल गया। ऐसे मरीजाें को हालत खराब होने पर दिल्ली रैफर किया जा रहा है।

जीआरएमसी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रदीप प्रजापति का कहना है कि अगर किसी काे सामान्य वायरल फीवर है तो भी उसे गंभीरता से लें और विशेषज्ञ को दिखाएं। जांच में अगर सामान्य वायरल होगा तो रोगी तीन-चार दिन में दवा लेकर ठीक हो जाता है, अगर वह कोरोना संक्रमित है तो भी समय रहते इलाज मिलने से वह ठीक हो जाएगा। कोरोना के जो नए मरीज आ रहे हैं, उनमें ये बात अब आम है कि वे देरी से इलाज शुरू कर रहे हैं और यही चीज घातक है।

ये हैं दो उदाहरण… दोनों ने लक्षणों को वायरल फीवर समझा
केस-1:
शिवपुरी निवासी 60 वर्षीय वृद्ध को जुकाम व तेज बुखार होने पर लगा कि ये सामान्य वायरल फीवर है। उन्हाेंने बुखार की दवा ले ली, पर डॉक्टर को नहीं दिखाया। चार दिन बाद उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी, तब उन्होंने विशेषज्ञ को दिखाया। जांच में वे पाॅजिटिव अाए। डॉक्टरों ने दिल्ली ले जाने के लिए कहा है।

केस-2: झांसी निवासी 55 वर्षीय व्यक्ति को जुकाम के साथ खांसी थी। पहले घरेलू इलाज लिया, लेकिन आराम नहीं मिला। चार दिन बाद उनकी हालत बिगड़ने लगी तो उन्होंने झांसी में डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने जांच कराई तो उन्हें कोरोना निकला। गंभीर हालत होने पर उन्हें ग्वालियर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

6 बार टेस्ट कराए, चार बार रिपाेर्ट पाॅजिटिव आई
ग्वालियर| पड़ाव निवासी युवक सिंगापुर में मर्चेंट नेवी में कार्यरत है। वह छह बार कोरोना की जांच करा चुका है। तीन बार उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ चुकी है और तीन बार निगेटिव। इस कारण वह नौकरी पर नहीं जा पा रहा है। दरअसल, युवक कोरोना महामारी शुरू होने पर ग्वालियर स्थित घर लौट आया था। सितंबर में जब वह दिल्ली एयपोर्ट पहुंचा तो उसने वहां जांच कराई। इसमें वह पॉजिटिव निकला।

वह दिल्ली में भर्ती रहा और ठीक होने के बाद घर लौट आया। 26 सितंबर को फिर से जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद युवक ने दिल्ली के सरकारी अस्पताल में 3 अक्टूबर को फिर से जांच कराई, लेकिन संक्रमण होने की पुष्टि हुई। अगले दिन 4 अक्टूबर को दिल्ली की निजी लैब में जांच कराई। इस बार उसे संक्रमण नहीं निकला। 17 अक्टूबर को उसने मुरार अस्पताल में टेस्ट कराया तो रिपोर्ट निगेटिव आई। युवक ने अंतिम बार 31 अक्टूबर को नमूना दिया, जिसमें वह संक्रमित पाया गया।



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