बिहार चुनावः Exit Poll के बारे में वह सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं

बिहार चुनावः Exit Poll के बारे में वह सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं


Bihar Assembly elections 2020: बिहार में 7 नवंबर को विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण का मतदान समाप्त होते ही एक्जिट पोल (Bihar Chunav Exit Poll) के आने की शुरुआत हो जाएगी. आइए इससे पहले जान लेते हैं कि क्या होता है एग्जिट पोल.

Bihar Assembly elections 2020: बिहार में 7 नवंबर को विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण का मतदान समाप्त होते ही एक्जिट पोल (Bihar Chunav Exit Poll) के आने की शुरुआत हो जाएगी. आइए इससे पहले जान लेते हैं कि क्या होता है एग्जिट पोल.


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    November 6, 2020, 8:00 AM IST

पटना. बिहार में विधानसभा की 243 सीटों के लिए हो रहे चुनाव (Bihar Chunav 2020) के लिए कल तीसरे और आखिरी चरण के वोट डाले जाएंगे. शनिवार 7 नवंबर को मतदान की समाप्ति के बाद राजनीतिक दलों को 10 नवंबर का इंतजार रहेगा, जिस दिन परिणाम (Bihar Election Result) घोषित होंगे. लेकिन इससे पहले आखिरी चरण के मतदान के तुरंत बाद एग्जिट पोल (Exit Poll 2020) यानी मतदान के बाद के सर्वेक्षण के नतीजे आएंगे, जिसका इंतजार राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम लोगों को भी रहता है. कोरोनाकाल (COVID-19 era) में बिहार में हो रहे चुनाव पर देशभर की नजरें टिकी हैं, जाहिर है लोगों को इस चुनाव के एग्जिट पोल का भी बेसब्री से इंतजार है.

एग्जिट पोल क्या है
चुनाव के लिए मतदान के बाद होने वाले एग्जिट पोल या सर्वेक्षण, दरअसल मतदाताओं के वोट देने के बाद उनसे तुरंत ली गई प्रतिक्रिया है. इससे मतदाताओं के किसी दल या नेता के प्रति वोट देने के रुझान की जानकारी मिलती है. विभिन्न चुनावों में अलग-अलग संगठन सर्वेक्षण के कई तरीकों का इस्तेमाल कर एग्जिट पोल करते हैं.

कैसे किए जाते हैं एग्जिट पोलएग्जिट पोल करने वाली एजेंसियां या संगठन, इस तरह के सर्वे के लिए कई तरीके अपनाती हैं. मतदान केंद्र से वोट देकर बाहर आने वाले वोटर या पूरे क्षेत्र के मतदाताओं से उम्मीदवारों के बारे में राय जुटाना इसके तरीके हैं. इनमें सबसे प्रचलित तरीका है सैंपलिंग मेथड. सर्वे करने वाली एजेंसी मतदाताओं की उम्र, लिंग, जाति, क्षेत्र और अन्य कई जानकारियों के आधार पर एक निश्चित क्षेत्र के लोगों से राय लेकर सर्वे कर सकती हैं. वहीं, कुछ संगठन मतदान बूथ के बाहर अलग-अलग उम्र या जाति या धर्म के वोटरों से बात करके भी अपेक्षित परिणाम जुटाते हैं.

ओपिनियन पोल से अलग कैसे
एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल को लेकर कई बार एक जैसा होने का भ्रम होता है, लेकिन वास्तविक रूप में ये दोनों अलग-अलग हैं. आम तौर पर ओपिनियन पोल जहां चुनाव से पहले किसी नेता या दल को लेकर जनता की राय के संदर्भ में होता है. वहीं, एग्जिट पोल मतदान के बाद ही किए जाते हैं. ऐसा माना जाता है कि मतदान कर बूथ से बाहर आने वाला वोटर सर्वे के दौरान सटीक राय देता है.

इस बारे में नियम क्या है
जनप्रतिनिधि कानून 1951 की धारा 126A के मुताबिक, चुनाव के दौरान एग्जिट पोल किए जाने को लेकर स्पष्ट नियम है. इस कानून में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत ही किसी भी व्यक्ति या संगठन को ऐसे एग्जिट पोल करने या उसे प्रकाशित करने का अधिकार है. यानी कि बिना चुनाव आयोग की अनुमति के एग्जिट पोल नहीं किए जा सकते हैं. इस संदर्भ में आयोग भी हर चुनाव से पहले ऐसे दिशा-निर्देश जारी करता है. बिहार चुनाव के लिए भी चुनाव आयोग ने ऐसे निर्देश जारी किए हैं.

चुनाव आयोग के नियम के मुताबिक बिहार चुनाव के लिए होने वाले अंतिम चरण के मतदान की समाप्ति से पहले एग्जिट पोल का प्रकाशन या प्रसारण नहीं किया जा सकता है. न तो कोई समाचार एजेंसी या अखबार या टीवी चैनल या फिर वेबसाइट, एग्जिट पोल जारी कर सकते हैं. चुनाव आयोग ने एग्जिट पोल के अलावा ओपिनियन पोल के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इसमें कहा गया है कि टीवी चैनल, अखबार, केबल नेटवर्क, वेबसाइट या सोशल मीडिया पर भी ऐसे किसी भी तरह के अनुमान आधारित आंकड़ों का प्रकाशन या प्रसारण नहीं किया जा सकता है.





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