इमरती देवी. फाइल फोटो.
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में उपचुनाव (By-Election) के दौरान सबसे ज्यादा चर्चित सीटों में से एक ग्वालियर की डबरा (Dabara) सीट से थी.
साल 2018 के मुख्य चुनाव में डबरा सीट पर 2.28 लाख मतदाता थे. इनमें से 68.12 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था. जीत का अंतर 57446 वोटों का था. उपचुनाव में कमलनाथ के जिस बयान पर विवाद खड़ा हुआ, वह यहीं की सभा में दिया गया था. जवाब में इमरती ने भी विवादित बयान दिया था, जो राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बनीं.
इसलिए हुई भाजपा की हार
– बिकाऊ प्रत्याशी की वजह से जनता नाराज थी. इसका नुकसान हुआ.- कमलनाथ के अलावा कई विवादित बयान दिए. जैसे ‘इमरती हार भी जाएंगी तो मंत्री बनी रहेंगी’. ‘सरकार और सत्ता में इतना दम रहता है कि कलक्टर से बोल देने से कोई भी सीट जीती जा सकती है’ जैसे बयान दिए. कमलनाथ को कबाड़ी, शराबी, गुंडा कहा और उनके घर की बहुओं पर भी निशाना साधा.
-कांग्रेस कैंडिडेट सुरेश राजे रिश्ते में इमरती के समधी हैं. इनकी क्षेत्र में अच्छी पकड़ है. दलित नेता हैं. इमरती के भाजपा में जाने से दलित-पिछड़े नाराज हैं.
– इमरती को हराने के पिछे भितरघात भी एक बड़ी वजह है. इमरती के करीबियों ने हार के लिए नरेंद्र सिंह तोमर गुट, नरोत्तम मिश्रा गुट के लोगों पर भी सवाल खड़े किए.