कोर्ट ने कंप्यूटर बाबा को 28 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया है.
कमलनाथ सरकार में दर्जा प्राप्त मंत्री रहे कंप्यूटर बाबा (Computer Baba) की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. कोर्ट ने जबरन घर में घुसकर एक व्यक्ति पर तलवार से हमले के प्रयास के मामले में जमानत देने से इंकार कर दिया है. वह अब 28 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में रहेंगे.
इससे पहले, एक दिन की पुलिस हिरासत अवधि खत्म होने के बाद शहर की एरोड्रम थाना पुलिस ने कंप्यूटर बाबा को अदालत में पेश किया था. अधिकारियों ने बताया कि एरोड्रम थाने में दर्ज मामले में कंप्यूटर बाबा और उनके कुछ साथियों पर आरोप है कि उन्होंने राजेश खत्री नाम के व्यक्ति के घर में जबरन घुसकर ना केवल उससे गाली-गलौज और मारपीट की बल्कि उस पर तलवार से हमले का प्रयास भी किया. खत्री का आरोप है कि यह घटना करीब डेढ़ महीने पहले इसलिए हुई क्योंकि उन्होंने कंप्यूटर बाबा के अम्बिकापुरी एक्सटेंशन स्थित आश्रम में चलने वाली ‘अनैतिक गतिविधियों’ को लेकर विवादास्पद धार्मिक नेता के सामने आपत्ति जताई थी.
सरकारी वकील ने कही ये बात
सरकारी वकील विमल मिश्रा ने बताया कि कंप्यूटर बाबा की पुलिस हिरासत अवधि के दौरान वह तलवार बरामद कर ली गई है जो इस अपराध में इस्तेमाल की गई थी. साथ ही यह भी बताया कि एक अन्य अदालत ने दूसरे मामले में गांधी नगर पुलिस को अनुमति दी है कि वह जेल में न्यायिक हिरासत के तहत बंद कंप्यूटर बाबा से बुधवार को पूछताछ कर सकती है. उन्होंने बताया कि इस मामले में कंप्यूटर बाबा और उनके कुछ साथियों पर अनुसूचित जाति वर्ग से ताल्लुक रखने वाले एक ग्राम पंचायत सचिव से आठ नवम्बर को अभद्रता, मारपीट और गाली-गलौज के आरोप है. प्राथमिकी में यह आरोप भी है कि विवादास्पद धार्मिक नेता ने जम्बूर्डी हप्सी गांव की पंचायत के इस सचिव पर बंदूक तानी और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उसे जान से मारने की धमकी दी.सरकारी वकील ने बताया कि जेल में पूछताछ के दौरान कंप्यूटर बाबा से इस अपराध में इस्तेमाल बंदूक के बारे में भी सवाल किए जाएंगे. जबकि अधिकारियों ने बताया कि पुलिस और प्रशासन के दल ने इंदौर शहर से सटे जम्बूर्डी हप्सी गांव में सरकारी जमीन पर बने कंप्यूटर बाबा के कथित रूप से अवैध आश्रम को आठ नवंबर को ढहा दिया था. इसके साथ ही, भाजपा और कांग्रेस की पिछली सरकारों में राज्य मंत्री के दर्जे से नवाजे गए धार्मिक नेता को दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 151 (संज्ञेय अपराध घटित होने से रोकने के लिये की जाने एहतियातन गिरफ्तारी) के तहत सीधे जेल भेज दिया गया था. उन्होंने बताया कि इस कार्रवाई के बाद कंप्यूटर बाबा के खिलाफ गांधी नगर और एरोड्रम क्षेत्रों के पुलिस थानों में दो आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे.