कोरोना वाली दूरी खत्म: पारंपरिक मार्ग से ही निकली कार्तिक की पहली सवारी, रास्तेभर भक्तों ने बरसाए फूल

कोरोना वाली दूरी खत्म: पारंपरिक मार्ग से ही निकली कार्तिक की पहली सवारी, रास्तेभर भक्तों ने बरसाए फूल


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उज्जैन11 मिनट पहले

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कार्तिक में राजाधिराज महाकालेश्वर की पहली सवारी निकाली गई

कार्तिक में राजाधिराज महाकालेश्वर की पहली सवारी सोमवार को पारंपरिक मार्ग पर निकाली गई। इसके पहले कोरोना संक्रमण के कारण श्रावण-भादौ की सवारियों के लिए प्रशासन ने पारंपरिक मार्ग की बजाए सवारी को छोटे रूट से निकाला था लेकिन अब संक्रमण नियंत्रण में होने से प्रशासन ने कार्तिक की सवारियों को पारंपरिक रूट से ही निकालने का फैसला किया।

इस कारण एक साल बाद सवारी पारंपरिक रूट पर निकाली गई। भगवान महाकालेश्वर की श्रावण-भादौ व कार्तिक-अगहन में सवारियां निकाली जाती हैं। इसके अलावा दशहरा और वैकुंठ चतुर्दशी पर भी महाकालेश्वर की सवारी निकलती है।

कोरोना संक्रमण की गाइड लाइन के चलते श्रावण में सवारियों के लिए छोटा रूट तय किया था तथा श्रद्धालुओं को सवारी मार्ग पर आने पर प्रतिबंध लगाया था। सवारी मार्ग को हर तरफ से बेरिकेडिंग कर बंद किया गया था। श्रावण-भादौ की सभी सवारियां इसी तरह बंद मार्ग पर निकाली गई थी।

23 नवंबर को अगली सवारी

महाकाल की अगली सवारी 23 नवंबर को निकाली जाएगी। इसके बाद 28 को रात 11 बजे वैकुंठ चतुर्दशी की सवारी निकलेगी, जो महाकाल मंदिर से गोपाल मंदिर जाएगी, जहां हरिहर मिलन होगा।



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