पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी के साथ थी दोस्ती: दादा बैजनाथ शर्मा नहीं रहे, शुक्रवार सुबह ली अंतिम सांस

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी के साथ थी दोस्ती: दादा बैजनाथ शर्मा नहीं रहे, शुक्रवार सुबह ली अंतिम सांस


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27 मिनट पहले

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दादा बैजनाथ शर्मा की यादें जब वह अपने शखा पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी के साथ बैठे हुए हैं

सार्वजनिक जीवन में अपने नाम से नहीं बल्कि मास्टर जी नाम से चर्चित पंडित बैजनाथ शर्मा का शुक्रवार सुबह 10 बजे निधन हो गया है। वह काफी समय से अस्वस्थ् चल रहे थे। वह 94 साल के थे। उनका जन्म 3 अगस्त 1926 मुरार में हुआ था। उनके निधन का समाचार शुक्रवार दोपहर सोशल मीडिया पर उनके साथ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी के फोटो के साथ वायरल हुआ है। पूर्व प्रधानमंत्री के साथ ग्वालियर में उन्होंने काफी काम किया है। साथ ही संघ के लिए काफी मेहनत की है। शुक्रवार शाम उनका अंतिम संस्कार लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम में किया गया। अंतिम यात्रा उनके निवासी अरगड़े की गली से लक्ष्मीगंज के लिए ले जाई गई। कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए शहर के प्रमुख और गणमान्य नागरिक ही उनको अंतिम विदाई देने पहुंचे हैं।

उनको जानने वाले बताते हैं कि वे 13 साल की उम्र में ही संघ से जुड़कर आर्यसमाज में लगने वाली शाखा में जाने लगे थे। कारण, प्रतिष्ठित पत्रकार मामा माणिकचंद्र वाजपेयी का प्रभाव उन पर था, जो मुरार में उनके घर के पास ही रहते थे। उसके बाद से ही संघ के साथ उनका रिश्ता आजीवन रहा। उन्होंने जीवन में कई उतार- चढ़ाव देखे। छह साल की उम्र में मां का देहांत हो गया। पढ़ाई पूरी कर सरकारी स्कूल में मास्टर बने तो जेल जाने के कारण वह नौकरी भी छूट गई। डीएवी स्कूल नया बाजार में प्राचार्य रहे भारत भूषण त्यागी ने उन्हें शिक्षक की नौकरी दी। इस बीच संघ के ग्वालियर विभाग के सह संघचालक, मप्र शिक्षक संघ, मध्य भारतीय हिंदी साहित्य सभा के प्रमुख पदों पर समर्पित कार्यकर्ता की तरह सेवा करते रहे।



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