चीतों पर अधिकारियों की नजर: अफ्रीकन चीते लाने से पहले टीम ने लिया नौरादेही अभ्यारण का जायजा

चीतों पर अधिकारियों की नजर: अफ्रीकन चीते लाने से पहले टीम ने लिया नौरादेही अभ्यारण का जायजा


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दमोह7 मिनट पहले

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  • बाघों का कुनबा बढ़ने के बाद अब चीतों पर अधिकारियों की नजर

नौरादेही अभ्यारण में अफ्रीकन चीतों के लिए कितना उपयुक्त है और यहां पर वातावरण उनके हिसाब है कि नहीं, यह पता करने के लिए बुधवार को वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून के एक्सपर्ट की एक टीम सुबह सर्रा पहुंचीं। यहां पर आसपास उन्होंने भ्रमण किया और वन विभाग के अधिकारियों से लंबी चर्चा की।

टीम जंगल में उस नाला के पास भी गई, जहां पर पहले बाघ और चीतों की गुफाएं होने की बात कही जाती है। यहां पर नाला में पर्याप्त पानी है और गुफाएं भी नाला के आसपास ही हैं। डीएफओ राखी नंदा भी टीम में शामिल रहीं। देर शाम 7 बजे सभी सदस्यों की मीटिंग हुई, हालांकि अफ्रीकन चीते आएंगे कि नहीं, इसकी जानकारी गुरुवार को सामने आएगी।

यहां पर बता दें कि नौरादेही अभ्यारण में बाघों की संख्या बढ़ गई है। बाघिन राधा से जन्में तीन शावकों में से दो मादा और एक नर है। आने वाले समय में इनमें से दो मादाओं के बच्चे होंगे और अभ्यारण में बाघों का कुनबा बढ़ जाएगा, इसलिए वन विभाग अब बाघों की चिंता छोड़कर अफ्रीकन चीतों को लेकर गंभीर हो गया है। केंद्र सरकार अभ्यारण में अफ्रीकन चीते लाने की तैयारी कर रही है।

इसके लिए देहरादून की एक्सपर्ट की टीम अभ्यारण का जायजा लेने के लिए आई है। जो जायजा लेने के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को देगी, उसके बाद आगे की स्थिति तय होगी। मंगलवार को सागर और नरसिंहपुर से जुड़े अभ्यारण का जायजा लेने के बाद बुधवार को टीम झलोन के सर्रा परिक्षेत्र में पहुंचीं। यहां पर टीम ने परिक्षेत्र का जायजा लिया। तीन कारों में 7 से 8 अधिकारी शामिल थे।

स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि विशेषज्ञों की टीम जंगल के अंदर उस नाला के पास भी गई, जहां पर गुफाएं हैं। उसने बताया कि इस नाला में 12 महीने पानी रहता है और इसके आसपास ही गुफाओं में जानवर छिपे रहते हैं। यह गुफाएं बहुत पुरानी हैं। जिनमें कभी पहले बाघ और चीते रहने की बात कही जाती रही है। भ्रमण के बाद सुबह 12 बजे टीम रवाना हो गई।

बाद में देर शाम टीम के साथ डीएफओ राखी नंदा के साथ मीटिंग हुई। डीएफओ ने बताया कि विशेषज्ञों की टीम ने भ्रमण कर लिया है अब कुछ मुद्दों को लेकर मीटिंग चल रही है। इसके बाद तय होगा चीतों को अभ्यारण लाया जाएगा कि नहीं। उन्होंने बताया कि गुरुवार तक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

मां के सामने शिकार कर रहे हैं शावक

अभ्यारण में 2018 में पन्ना टाइगर रिजर्व से बाघिन राधा को लाया गया था। इसके बाद बांधवगढ़ नेशनल पार्क से बाघ किशन को लाया गया। दोनों के एक होने पर 8 मई 2019 को राधा ने गुफा में तीन शावकों को जन्म दिया। राधा तीनों शावकों के साथ एक साल तक नजर नहीं आई। बताते हैं कि वह किसी गुफा में बच्चों के साथ छिपी रही।

एक साल बाद मां बाघिन राधा तीनों शावकों के साथ घूमने के लिए निकली और मौका पाकर शिकार भी करने लगी। इस बीच बच्चे शिकार भी सीखने लगे। अब बाघिन के सामने शावक शिकार कर रहे हैं। वे कई गायों और भैंसों का अब तक शिकार कर चुके हैं। तीनों की उम्र भी करीब 19 माह हो गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक तीनों शावकों में एक नर और दो मादा हैं। इस तरह अभ्यारण में पांच बाघ बाघिन हो गए हैं।



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