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भोपाल2 घंटे पहले
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राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल को सशस्त्र सेना झंडा दिवस के अवसर पर (से.नि.) बिग्रेडियर अरूण सहगल, संचालक सैनिक कल्याण ने सैपल पिन लगाकर सहयोग राशि प्राप्त की।
- मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी सैनिक कल्याण के लिए दान राशि
- गृहमंत्री और राज्यपाल को भी लैपल पिन और फ्लैग लगाया गया
आज सशस्त्र सेना झंडा दिवस, हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 7 दिसंबर का दिन पूरे देश में भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस मनाया जा रहा है। बता दें कि भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस शहीदों और देश की रक्षा के लिए जान गंवाने वाले जवानों के सम्मान में मनाया जाता है, यह दिन हमारे देश के सभी सैनिकों के लिए है, इस बीच मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सशस्त्र सेना झंडा दिवस की दी शुभकामनाएं ।
भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सेना के अधिकारियों द्वारा सेना झंडा दिवस के प्रतीक स्वरूप एक बैज भेंट किया है, वही मुख्यमंत्री शिवराज ने सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर सेना के अधिकारियों को सैनिक कल्याण के लिए दान राशि भेंट की है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सशस्त्र सेना झंण्डा दिवस पर सैनिक कल्याण ब्रिगेडियर अरुण सहगल ने फ्लैग लगाया।
शिवराज ने सोशल मीडिया पर कहा कि
“भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस हमें अपने वीर जवानों के प्रति उत्तरदायित्वों की याद दिलाता है, देश की रक्षा के लिए प्राणोत्सर्ग करने वाले वीरों के परिवारों के कल्याण के लिए हम सब हाथ बढ़ाएं, हे धरा के सपूतों तुम्हें कोटि-कोटि प्रणाम”।
शिवराज ने कहा कि- “भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर वीर जवानों और उनके परिजनों को हृदय से प्रणाम करता हूं, देश-देशवासियों की रक्षा हेतु अपने प्राणों को उत्सर्ग करने वाले वीरों के परिवारों के कल्याण के लिए सहयोग करने का यह दिन है”।
नरोत्तम मिश्रा ने सोशल मीडिया पर कहा-
गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सोशल मीडिया पर कहा कि देश की सुरक्षा में समर्पित रहने वाले हमारी तीनों सेनाओं के जांबाज सैनिकों के शौर्य व साहस को नमन किया और सशस्त्र सेना झंडा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी है। मिश्रा ने कहा कि “हम-सब मिलकर अपने वीर जवानों और उनके परिजनों के कल्याण के लिए सशस्त्र सेना झंडा दिवस कोष में अवश्य योगदान दें”।

सैनिक कल्याण संचालनालय के संयुक्त संचालक (सेवानिवृत्त) कमांडर उदय सिंह गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को लैपल पिन और फ्लैग लगाते हुए।
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर फ्लैग लगाया
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर संचालक सैनिक कल्याण (से.नि.) ब्रिगेडियर अरूण सहगल ने लैपल पिन और फ्लैग लगाकर सहयोग राशि प्राप्त की। इस मौके पर सैनिक कल्याण संचालनालय के (सेवानिवृत्त) कमांडर उदय सिंह, संयुक्त संचालक संजय नायडू, सुमित लाल एवं अमित कुमार उपस्थित थे।
सशस्त्र सेना झंडा दिवस मनाने का उद्देश्य
7 दिसंबर का दिन सेना और इसके जवानों के लिए काफी खास माना जाता रहा है। इसकी वजह ये है कि इस दिन भारतीय सेना अपने बहादुर जवानों के कल्याण के लिए लिए भारत की जनता से धन संग्रह करती है। इस दिन को सशस्त्र सेना झंडा दिवस कहा जाता है। भारतीय सेना की तरफ से गणमान्य से लेकर आम लोगों को भारतीय सशस्त्र सेना के प्रतीक चिन्ह झंडे को लगाकर उनसे ये अपेक्षा की जाती है कि वो अपने बहादुर जवानों के कल्याण के लिए कुछ आर्थिक सहयोग इस झंडे में शामिल लाल, गहरा नीला और हल्के नीले रंगों की पट्टियां तीनों सेनाओं को प्रदर्शित करती हैं। 1949 में पहली बार इस दिन को मनाया गया था। तब से लेकर आज तक ये निरंतर मनाया जा रहा है।
ये दिन हमें इस बात का भी अहसास दिलाता है कि सीमा पर मुश्किल हालातों में डटे जवानों के परिजनों के लिए हम भी दूसरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। इस दिन को मनाने के पीछे तीन अहम मकसद हैं। इनमें पहला मकसद युद्ध के दौरान होने वाली हानि में सहयोग करना, दूसरा मकसद सेना के जवानों और उनके परिवारों की मुश्किल हालात में मदद करना, तीसरा मकसद रिटायर हो चुके जवानों और उनके परिवार का कल्याण करना।
आपको बता दें कि इस दिन देश के लाखों लोग सेना के जवानों के लिए आर्थिक सहयोग में भागीदारी निभाते हैं। इसके अलावा कोई भी इच्छुक व्यक्ति केंद्रीय सैनिक बोर्ड की वेबसाइट पर जाकर भी ऑनलाइन अपना सहयोग इसमें कर सकता है। 28 अगस्त 1949 को तत्कालीन पंडित जवाहर लाल नेहरू की सरकार द्वारा भारतीय सेना के जवानों के कल्याण के लिए धन एकत्रित करने के मकसद से एक कमेटी का गठन किया गया था। इसकी सिफारिशों के बाद ही 7 दिसंबर को इस दिन के लिए चुना गया।
इस दिन को मनाने का एक बड़ा मकसद ये भी था कि देश की जनता अपने बहादुर सैनिकों के प्रति अपना आभार व्यक्त कर सके और साथ ही उन्हें इस बात का भी अहसास हो सके कि उनकी और उनके परिवार की मदद करना कितना जरूरी है। सेना के जवानों की मदद और उनके कल्याण के लिए ये दिन केवल भारत में ही नहीं बल्कि दूसरे देशों में भी मनाया जाता है। इसमें ब्रिटेन जहां इसकी शुरुआत 1956 में हुई थी, इसके अलावा साइप्रस, केन्या और नाइजीरिया शामिल हैं।